By Malay Ojha | Published: 30 June 2026 at 04:42 PM
बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। तेरहवीं के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने का ऐलान किया गया। आंदोलन से जुड़े नेताओं और अधिवक्ताओं ने घोषणा की कि 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा धरना-प्रदर्शन होगा, साथ ही देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा। उनका कहना है कि भरत तिवारी मामले में न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई और जन आंदोलन दोनों साथ-साथ जारी रहेंगे।
शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में आयोजित प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा, वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा के संयोजक पंकज त्रिपाठी और हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अनिल कुमार सिंह मौजूद रहे। तीनों ने कहा कि अब इस मुद्दे को सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर न्याय की मांग उठाई जाएगी।
हस्ताक्षर अभियान के जरिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक पहुंचेगी मांग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि आंदोलन के तहत देशभर में हस्ताक्षर अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से लोगों का समर्थन जुटाकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि मामले की जांच में कई ऐसे सवाल हैं जिनका अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
एसपी समेत सभी जिम्मेदार अधिकारियों की जांच की मांग
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा ने कहा कि इस मामले में एसपी सहित सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जांच की निगरानी किसी मौजूदा न्यायाधीश की देखरेख में हो ताकि पूरे मामले में पारदर्शिता बनी रहे। उनका यह भी कहना था कि जिन पुलिसकर्मियों पर सवाल उठ रहे हैं, उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित किया जाए और बाद में कानून के अनुसार कार्रवाई हो।
30 जून तक का इंतजार खत्म, अब आंदोलन होगा और बड़ा
वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि सरकार को कार्रवाई के लिए 30 जून तक का समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी कारण विभिन्न संगठनों की सहमति से आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने का फैसला किया गया है।
उन्होंने बताया कि पहले बिहार विधानसभा का घेराव करने की योजना थी, लेकिन बाद में रणनीति बदलकर सीधे दिल्ली में प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया ताकि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों तक न्याय की मांग पहुंचाई जा सके।
17 जुलाई को श्रद्धांजलि सभा के साथ होगा प्रदर्शन
आंदोलन की अगली बड़ी कड़ी के रूप में 17 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर श्रद्धांजलि सभा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए गांव-गांव और शहर-शहर लोगों से संपर्क किया जा रहा है। हस्ताक्षर अभियान भी इसी तैयारी का हिस्सा है।
21 वकीलों की कानूनी समिति बनाई गई
पंकज त्रिपाठी ने बताया कि आंदोलन के संचालन के लिए वीर शहीद भरत तिवारी न्याय संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया है। इसके तहत कुल 18 समितियां बनाई गई हैं। फिलहाल कानूनी समिति सबसे सक्रिय रहेगी।
उन्होंने बताया कि 21 अधिवक्ताओं की विशेष टीम तैयार की गई है। इस समिति का नेतृत्व स्वयं पंकज त्रिपाठी करेंगे, जबकि भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी को उप-संयोजक बनाया गया है। उनका कहना है कि पूरी लड़ाई संविधान और कानून के दायरे में रहकर लड़ी जाएगी।
साक्ष्य जुटाने के लिए अलग टीम भी गठित
हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं क्षत्रिय करणी सेना के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि संगठन परिवार की ओर से दी गई मूल तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनाएगा। उन्होंने बताया कि कथित हत्या से जुड़े सभी संभावित साक्ष्य जुटाने के लिए अलग टीम बनाई गई है, ताकि अदालत में मजबूत पैरवी की जा सके।
क्या है भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला?
भरत भूषण तिवारी की 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान मौत हो गई थी। पुलिस की प्राथमिकी के अनुसार, कार्रवाई के दौरान एसटीएफ के एक जवान ने आत्मरक्षा में चार राउंड गोली चलाई थी। पुलिस का दावा है कि भरत तिवारी को कई बार आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी गई, लेकिन उसने पुलिस टीम पर फायरिंग जारी रखी। इस दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष ने भी एक राउंड गोली चलाई थी।
पुलिस का दावा और परिवार के आरोप आमने-सामने
प्राथमिकी के अनुसार भरत तिवारी के एक हाथ में मोबाइल फोन और दूसरे हाथ में पिस्टल थी। पुलिस का कहना है कि उसने पहले हथियार फेंका, लेकिन जब एक जवान उसे उठाने पहुंचा तो उसने दोबारा पिस्टल उठाकर पुलिस पर दो राउंड फायरिंग कर दी। इसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी।
दूसरी ओर, परिवार और आंदोलन से जुड़े लोग इस पूरे घटनाक्रम को संदिग्ध बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को लेकर अब कानूनी लड़ाई के साथ राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
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