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बिना एक रुपया खर्च किए चमकेंगे सरकारी भवन! बिहार में लगेंगे 500 मेगावाट सोलर प्लांट, बिजली बिल में होगी बड़ी बचत

By Malay Ojha | Published: 08 July 2026 at 09:21 PM

बिहार सरकार ने सरकारी भवनों में बिजली की बढ़ती खपत कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अगले पांच वर्षों में सरकारी और सरकार के अधीन आने वाले भवनों की छतों पर 500 मेगावाट क्षमता के ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि इन संयंत्रों को लगाने के लिए सरकारी विभागों को शुरुआती पूंजी खर्च नहीं करनी पड़ेगी। पूरी व्यवस्था विशेष मॉडल के तहत लागू की जाएगी, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से लेकर 2029-30 तक चरणबद्ध तरीके से इस योजना को लागू करने का लक्ष्य तय किया है। योजना के तहत सचिवालय, विभागीय कार्यालयों, सरकारी संस्थानों और अन्य सरकारी भवनों की खाली छतों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाएगा। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ेगा और सरकारी परिसरों में बिजली की जरूरत का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा।

सरकार नहीं लगाएगी शुरुआती पैसा
इस पूरी योजना को रेस्को मॉडल के आधार पर लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने, उनका संचालन करने और समय-समय पर रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी निजी डेवलपर की होगी। यानी सरकारी विभागों को संयंत्र लगाने के लिए किसी तरह का प्रारंभिक निवेश नहीं करना पड़ेगा। इससे परियोजना तेजी से आगे बढ़ सकेगी और विभागों पर आर्थिक दबाव भी नहीं आएगा।

बिजली खरीदने के लिए होगा समझौता
राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों और सरकारी संस्थानों को डेवलपर के साथ बिजली खरीद समझौता करने की भी मंजूरी दे दी है। इस समझौते के तहत सौर संयंत्रों से बनने वाली बिजली तय शर्तों के अनुसार सरकारी विभाग खरीदेंगे। इससे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी सुनिश्चित रहेगी और परियोजना का संचालन लंबे समय तक सुचारु रूप से किया जा सकेगा।

बिजली बिल में आएगी बड़ी राहत
सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी। इससे हर महीने आने वाले बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भवनों की छतों का बेहतर उपयोग होने से बिजली उत्पादन बढ़ेगा और लंबे समय में सरकार को करोड़ों रुपये की बचत भी होगी।

पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा
यह योजना केवल बिजली बचाने तक सीमित नहीं है। सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। जल-जीवन-हरियाली अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्वच्छ वातावरण तैयार करना है। ऐसे में सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना इस अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकारी भवन बनेंगे स्वच्छ ऊर्जा के केंद्र
सरकार का मानना है कि यदि सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा का सफल उपयोग होता है तो इसका सकारात्मक संदेश आम लोगों तक भी पहुंचेगा। इससे निजी संस्थानों और आम नागरिकों के बीच भी छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की रुचि बढ़ सकती है। आने वाले वर्षों में यह पहल ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बिजली बचत के क्षेत्र में राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

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बिना एक रुपया खर्च किए चमकेंगे सरकारी भवन! बिहार में लगेंगे 500 मेगावाट सोलर प्लांट, बिजली बिल में होगी बड़ी बचत

By Malay Ojha | Published: 08 July 2026 at 09:21 PM

बिहार सरकार ने सरकारी भवनों में बिजली की बढ़ती खपत कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत अगले पांच वर्षों में सरकारी और सरकार के अधीन आने वाले भवनों की छतों पर 500 मेगावाट क्षमता के ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि इन संयंत्रों को लगाने के लिए सरकारी विभागों को शुरुआती पूंजी खर्च नहीं करनी पड़ेगी। पूरी व्यवस्था विशेष मॉडल के तहत लागू की जाएगी, जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ भी नहीं पड़ेगा।

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से लेकर 2029-30 तक चरणबद्ध तरीके से इस योजना को लागू करने का लक्ष्य तय किया है। योजना के तहत सचिवालय, विभागीय कार्यालयों, सरकारी संस्थानों और अन्य सरकारी भवनों की खाली छतों का उपयोग सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाएगा। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा का दायरा तेजी से बढ़ेगा और सरकारी परिसरों में बिजली की जरूरत का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा।

सरकार नहीं लगाएगी शुरुआती पैसा
इस पूरी योजना को रेस्को मॉडल के आधार पर लागू किया जाएगा। इस व्यवस्था में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने, उनका संचालन करने और समय-समय पर रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी निजी डेवलपर की होगी। यानी सरकारी विभागों को संयंत्र लगाने के लिए किसी तरह का प्रारंभिक निवेश नहीं करना पड़ेगा। इससे परियोजना तेजी से आगे बढ़ सकेगी और विभागों पर आर्थिक दबाव भी नहीं आएगा।

बिजली खरीदने के लिए होगा समझौता
राज्य सरकार ने सभी संबंधित विभागों और सरकारी संस्थानों को डेवलपर के साथ बिजली खरीद समझौता करने की भी मंजूरी दे दी है। इस समझौते के तहत सौर संयंत्रों से बनने वाली बिजली तय शर्तों के अनुसार सरकारी विभाग खरीदेंगे। इससे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था भी सुनिश्चित रहेगी और परियोजना का संचालन लंबे समय तक सुचारु रूप से किया जा सकेगा।

बिजली बिल में आएगी बड़ी राहत
सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी। इससे हर महीने आने वाले बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भवनों की छतों का बेहतर उपयोग होने से बिजली उत्पादन बढ़ेगा और लंबे समय में सरकार को करोड़ों रुपये की बचत भी होगी।

पर्यावरण संरक्षण को भी मिलेगा बढ़ावा
यह योजना केवल बिजली बचाने तक सीमित नहीं है। सौर ऊर्जा के अधिक उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। जल-जीवन-हरियाली अभियान का उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और स्वच्छ वातावरण तैयार करना है। ऐसे में सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाना इस अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

सरकारी भवन बनेंगे स्वच्छ ऊर्जा के केंद्र
सरकार का मानना है कि यदि सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा का सफल उपयोग होता है तो इसका सकारात्मक संदेश आम लोगों तक भी पहुंचेगा। इससे निजी संस्थानों और आम नागरिकों के बीच भी छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की रुचि बढ़ सकती है। आने वाले वर्षों में यह पहल ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बिजली बचत के क्षेत्र में राज्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।

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