Sunday, May 31, 2026

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आत्मरक्षा के लिये बेटियों को मिले चाकू रखने का अधिकार : धनंजय, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)

By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 23 January 2026 at 09:37 AM

पटना (23 जनवरी 2026) : आत्मरक्षा के लिए बेटियों को चाकू जैसा हथियार रखने का अधिकार होना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे अपना बचाव कर सकें। उक्त बातें सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने प्रेस रिलीज जारी करके कही है।

पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष एवं यूपी प्रभारी धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सदियों से समाज में लड़कियों-महिलाओं को अकारण भी बड़े पैमाने पर हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। इसमें घरेलू हिंसा के साथ-साथ गलियों, सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर भी होने वाली हिंसाएँ भी शामिल हैं जिस पर लगाम लगा पाने में समाज और सरकारें अब तक विफल रही हैं।

इसलिए अगले 10 वर्षों के लिए लड़कियों-महिलाओं को सिक्खों की तरह चाकू (कृपाण) जैसा हथियार साथ लेकर चलने का अधिकार दिया जाना चाहिए जिससे आवश्यकता पड़ने पर वे अपनी रक्षा खुद कर सकें। आत्मरक्षा में अगर सामने वाला व्यक्ति घायल हो जाता है तो ऐसे में लड़कियों को सजा से छूट का प्रावधान होना चाहिए।

धनंजय ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से लड़कियों-महिलाओं के साथ अकारण होने वाली हिंसाओं में तुरंत 70 से 80 प्रतिशत की कमी आयेगी। अतः महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा पर अविलम्ब लगाम लगाने के लिए संसद द्वारा यह कानून तुरंत पास किया जाना चाहिए।

धनंजय ने कहा कि हाई स्कूलों में लड़कियों को आवश्यक रूप से लाठी चलाने-भांजने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। फिर 16 वर्ष होते ही उन्हें आवश्यक निर्देशों के साथ चाकू जैसा हथियार रखने का अधिकार दे दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गाँधी जी ने भी महिलाओं द्वारा आत्मरक्षा के लिए की जाने वाली हिंसा को जायज माना था। सरकार के इस निर्णय मात्र से महिला-हिंसा में तुरंत 70 से 80 प्रतिशत की गिरावट आ जायेगी जबकि अन्य कोई भी विकल्प इसे रोकने में उतना कामयाब होता नहीं दिख रहा है।

श्री सिन्हा ने कहा कि यह बात भी जरूर है कि कुछ महिलाएं इस नियम का नाजायज फायदा भी उठाएंगी। पर उन कुछ संभावित गड़बड़ियों से बचने के लिए इतने बड़े सुधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक 10 वर्षों पर इस कानून की समीक्षा का प्रावधान होना चाहिए एवं महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा की घटनाओं के मामलों में जब समाज में एक अनुशासन का माहौल बन जाए तब इस नियम को हटाया भी जा सकता है लेकिन अभी तुरंत इसे लागू करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रतिनिधि शीघ्र इस मामले को लेकर सरकार से वार्तालाप करेंगे।

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आत्मरक्षा के लिये बेटियों को मिले चाकू रखने का अधिकार : धनंजय, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)

By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 23 January 2026 at 09:37 AM

पटना (23 जनवरी 2026) : आत्मरक्षा के लिए बेटियों को चाकू जैसा हथियार रखने का अधिकार होना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे अपना बचाव कर सकें। उक्त बातें सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) ने प्रेस रिलीज जारी करके कही है।

पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष एवं यूपी प्रभारी धनंजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सदियों से समाज में लड़कियों-महिलाओं को अकारण भी बड़े पैमाने पर हिंसा का शिकार होना पड़ रहा है। इसमें घरेलू हिंसा के साथ-साथ गलियों, सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर भी होने वाली हिंसाएँ भी शामिल हैं जिस पर लगाम लगा पाने में समाज और सरकारें अब तक विफल रही हैं।

इसलिए अगले 10 वर्षों के लिए लड़कियों-महिलाओं को सिक्खों की तरह चाकू (कृपाण) जैसा हथियार साथ लेकर चलने का अधिकार दिया जाना चाहिए जिससे आवश्यकता पड़ने पर वे अपनी रक्षा खुद कर सकें। आत्मरक्षा में अगर सामने वाला व्यक्ति घायल हो जाता है तो ऐसे में लड़कियों को सजा से छूट का प्रावधान होना चाहिए।

धनंजय ने कहा कि सरकार के इस निर्णय से लड़कियों-महिलाओं के साथ अकारण होने वाली हिंसाओं में तुरंत 70 से 80 प्रतिशत की कमी आयेगी। अतः महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा पर अविलम्ब लगाम लगाने के लिए संसद द्वारा यह कानून तुरंत पास किया जाना चाहिए।

धनंजय ने कहा कि हाई स्कूलों में लड़कियों को आवश्यक रूप से लाठी चलाने-भांजने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। फिर 16 वर्ष होते ही उन्हें आवश्यक निर्देशों के साथ चाकू जैसा हथियार रखने का अधिकार दे दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गाँधी जी ने भी महिलाओं द्वारा आत्मरक्षा के लिए की जाने वाली हिंसा को जायज माना था। सरकार के इस निर्णय मात्र से महिला-हिंसा में तुरंत 70 से 80 प्रतिशत की गिरावट आ जायेगी जबकि अन्य कोई भी विकल्प इसे रोकने में उतना कामयाब होता नहीं दिख रहा है।

श्री सिन्हा ने कहा कि यह बात भी जरूर है कि कुछ महिलाएं इस नियम का नाजायज फायदा भी उठाएंगी। पर उन कुछ संभावित गड़बड़ियों से बचने के लिए इतने बड़े सुधार को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक 10 वर्षों पर इस कानून की समीक्षा का प्रावधान होना चाहिए एवं महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा की घटनाओं के मामलों में जब समाज में एक अनुशासन का माहौल बन जाए तब इस नियम को हटाया भी जा सकता है लेकिन अभी तुरंत इसे लागू करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रतिनिधि शीघ्र इस मामले को लेकर सरकार से वार्तालाप करेंगे।

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