Sunday, May 31, 2026

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अभिषेक बनर्जी के साथ हुई घटना पर भड़के मुकेश सहनी, भाजपा को लेकर कह दी ऐसी बात जिसने बढ़ा दी सियासी हलचल

By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 31 May 2026 at 01:46 PM

देश की राजनीति में इन दिनों बढ़ते राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप के बीच विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक तथा बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी का एक बड़ा बयान सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ हुई कथित मारपीट की घटना को लेकर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सहनी ने इस पूरे मामले को केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

मुकेश सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और राजनीतिक दल को अपनी राय रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। किसी नेता की नीतियों, विचारों या कार्यशैली से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा या मारपीट को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस और वैचारिक संघर्ष लोकतंत्र की ताकत हैं, जबकि हिंसा उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकती है। ऐसे मामलों को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था विचारों की विविधता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने विचारों और नीतियों के साथ जनता के बीच जाते हैं। ऐसे माहौल में यदि विरोधियों को डराने, धमकाने या शारीरिक रूप से निशाना बनाने की प्रवृत्ति बढ़ती है तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।

उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं माना जा सकता। यह उस व्यवस्था पर भी चोट है, जिसे संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं ने वर्षों की मेहनत से मजबूत बनाया है।

भाजपा पर साधा निशाना
मुकेश सहनी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों को कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के दायरे में रहने की सीख देनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के प्रति बढ़ती आक्रामकता स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। सहनी ने कहा कि सत्ता में रहने वाले दलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि उनके आचरण का प्रभाव समाज और राजनीति दोनों पर पड़ता है।

राजनीतिक संवाद को बताया जरूरी
पूर्व मंत्री ने कहा कि देश की राजनीति का केंद्र बिंदु जनता के मुद्दे होने चाहिए। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याएं और विकास जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों को बहस करनी चाहिए। यदि राजनीति केवल टकराव और व्यक्तिगत हमलों तक सीमित हो जाएगी तो इसका नुकसान लोकतांत्रिक संस्कृति को होगा।

उन्होंने कहा कि संवाद और बहस लोकतंत्र की पहचान हैं। असहमति को सम्मानपूर्वक स्वीकार करना और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर राजनीति करना सभी दलों की जिम्मेदारी है।

सभी दलों से की संयम बरतने की अपील
मुकेश सहनी ने सभी राजनीतिक दलों से संयम और जिम्मेदारी का परिचय देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन इसे व्यक्तिगत दुश्मनी या हिंसक घटनाओं का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि नेताओं और कार्यकर्ताओं दोनों को यह समझना होगा कि उनके व्यवहार का असर समाज पर पड़ता है। यदि राजनीतिक मंचों से कटुता और आक्रामकता बढ़ेगी तो उसका असर आम लोगों के बीच भी दिखाई देगा।

निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
घटना को लेकर सहनी ने स्पष्ट रूप से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होने से लोकतंत्र में लोगों का भरोसा मजबूत होता है। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में भी मदद मिलती है।

लोकतंत्र में हिंसा के लिए नहीं है जगह
अपने बयान के अंत में मुकेश सहनी ने कहा कि मतभेद लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया हैं, लेकिन हिंसा कभी भी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सहनी ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक लड़ाई विचारों की होनी चाहिए, न कि हिंसा और टकराव की। यदि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखना है तो सभी दलों को संयम, संवाद और संवैधानिक मूल्यों के रास्ते पर चलना होगा।

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अभिषेक बनर्जी के साथ हुई घटना पर भड़के मुकेश सहनी, भाजपा को लेकर कह दी ऐसी बात जिसने बढ़ा दी सियासी हलचल

By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 31 May 2026 at 01:46 PM

देश की राजनीति में इन दिनों बढ़ते राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप के बीच विकासशील इंसान पार्टी के संस्थापक तथा बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी का एक बड़ा बयान सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ हुई कथित मारपीट की घटना को लेकर उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सहनी ने इस पूरे मामले को केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

मुकेश सहनी ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति और राजनीतिक दल को अपनी राय रखने तथा विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। किसी नेता की नीतियों, विचारों या कार्यशैली से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध के नाम पर हिंसा या मारपीट को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक बहस और वैचारिक संघर्ष लोकतंत्र की ताकत हैं, जबकि हिंसा उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन सकती है। ऐसे मामलों को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

लोकतांत्रिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था विचारों की विविधता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने विचारों और नीतियों के साथ जनता के बीच जाते हैं। ऐसे माहौल में यदि विरोधियों को डराने, धमकाने या शारीरिक रूप से निशाना बनाने की प्रवृत्ति बढ़ती है तो यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक संकेत है।

उन्होंने कहा कि किसी जनप्रतिनिधि पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं माना जा सकता। यह उस व्यवस्था पर भी चोट है, जिसे संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं ने वर्षों की मेहनत से मजबूत बनाया है।

भाजपा पर साधा निशाना
मुकेश सहनी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने कार्यकर्ताओं तथा समर्थकों को कानून और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के दायरे में रहने की सीख देनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के प्रति बढ़ती आक्रामकता स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। सहनी ने कहा कि सत्ता में रहने वाले दलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि उनके आचरण का प्रभाव समाज और राजनीति दोनों पर पड़ता है।

राजनीतिक संवाद को बताया जरूरी
पूर्व मंत्री ने कहा कि देश की राजनीति का केंद्र बिंदु जनता के मुद्दे होने चाहिए। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की समस्याएं और विकास जैसे विषयों पर राजनीतिक दलों को बहस करनी चाहिए। यदि राजनीति केवल टकराव और व्यक्तिगत हमलों तक सीमित हो जाएगी तो इसका नुकसान लोकतांत्रिक संस्कृति को होगा।

उन्होंने कहा कि संवाद और बहस लोकतंत्र की पहचान हैं। असहमति को सम्मानपूर्वक स्वीकार करना और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर राजनीति करना सभी दलों की जिम्मेदारी है।

सभी दलों से की संयम बरतने की अपील
मुकेश सहनी ने सभी राजनीतिक दलों से संयम और जिम्मेदारी का परिचय देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन इसे व्यक्तिगत दुश्मनी या हिंसक घटनाओं का रूप नहीं दिया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि नेताओं और कार्यकर्ताओं दोनों को यह समझना होगा कि उनके व्यवहार का असर समाज पर पड़ता है। यदि राजनीतिक मंचों से कटुता और आक्रामकता बढ़ेगी तो उसका असर आम लोगों के बीच भी दिखाई देगा।

निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
घटना को लेकर सहनी ने स्पष्ट रूप से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए और जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होने से लोकतंत्र में लोगों का भरोसा मजबूत होता है। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने में भी मदद मिलती है।

लोकतंत्र में हिंसा के लिए नहीं है जगह
अपने बयान के अंत में मुकेश सहनी ने कहा कि मतभेद लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया हैं, लेकिन हिंसा कभी भी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना सभी राजनीतिक दलों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सहनी ने जोर देकर कहा कि राजनीतिक लड़ाई विचारों की होनी चाहिए, न कि हिंसा और टकराव की। यदि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखना है तो सभी दलों को संयम, संवाद और संवैधानिक मूल्यों के रास्ते पर चलना होगा।

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