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परमाणु संयंत्र से जुड़ा संवेदनशील डेटा लीक! 19 हजार गोपनीय दस्तावेज सामने आने के दावे से मचा हड़कंप

By Malay Ojha | Published: 15 July 2026 at 05:07 PM

तमिलनाडु में स्थित देश के सबसे बड़े कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां इंटरनेट पर आने के दावे के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। दावा किया गया है कि करीब 19 हजार गोपनीय दस्तावेज हैकरों के हाथ लग गए हैं। इनमें संयंत्र के कुछ हिस्सों के नक्शे, निरीक्षण रिपोर्ट, बैठकों का रिकॉर्ड, उपकरणों की समीक्षा, बीमा दस्तावेज और सप्लायर से जुड़ी अहम जानकारियां शामिल हैं। हालांकि इन दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

‘वर्ल्ड लीक्स’ नाम के हैकर समूह ने दावा किया है कि उसके पास मौजूद दस्तावेज उस कंपनी से जुड़े हैं, जो कुडनकुलम परियोजना में ठेकेदार के तौर पर काम कर रही है। हैकरों का कहना है कि उनके पास कुल लाखों फाइलें हैं, जिनमें से करीब 19 हजार दस्तावेज सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इन फाइलों में परियोजना से जुड़े कई तकनीकी और प्रशासनिक रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है।

रिलायंस ने डेटा में सेंधमारी की पुष्टि की
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अनिल अंबानी समूह की ओर से स्वीकार किया गया है कि उसके कुछ डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई थी। कंपनी के मुताबिक यह डेटा एक बाहरी डेटा सेंटर सेवा प्रदाता ‘योट्टा’ के सर्वर पर रखा गया था। घटना की जानकारी भारत सरकार को भी दे दी गई है। हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर कौन-सा डेटा प्रभावित हुआ है और उसकी संवेदनशीलता कितनी है।

दस्तावेजों की सत्यता पर अभी भी सवाल
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसने लीक होने का दावा किए गए दस्तावेजों की जांच की है। ये फाइलें वर्ष 2016 से 2025 के बीच की बताई जा रही हैं। हालांकि समाचार एजेंसी ने साफ किया है कि वह इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकी है। ऐसे में फिलहाल यह दावा जांच के दायरे में है।

सुरक्षा विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता
परमाणु सुरक्षा मामलों पर काम करने वाली संस्था के वरिष्ठ अधिकारी निकोलस रोथ का कहना है कि यदि किसी परमाणु परियोजना से जुड़े तकनीकी दस्तावेज गलत हाथों में पहुंचते हैं तो यह सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। उनका मानना है कि यह घटना केवल एक कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि इससे यह सवाल भी उठता है कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां साइबर हमलों से निपटने के लिए कितनी तैयार हैं।

कुडनकुलम परियोजना में क्या है रिलायंस की भूमिका?
कुडनकुलम परमाणु बिजली परियोजना देश की सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है। वर्ष 2018 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को इस परियोजना की तीसरी और चौथी इकाई के डिजाइन और निर्माण का ठेका मिला था। दोनों इकाइयों पर निर्माण कार्य जारी है और इनके वर्ष 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। इनके शुरू होने के बाद लगभग दो हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की क्षमता जुड़ेगी।

फिरौती के लिए डेटा चुराने का आरोप
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ‘वर्ल्ड लीक्स’ ऐसा हैकर समूह माना जाता है जो कंपनियों का डेटा चुराकर बदले में फिरौती मांगता है। यदि मांग पूरी नहीं होती तो वह कथित तौर पर डेटा को सार्वजनिक या डार्क वेब पर जारी कर देता है। इसी वजह से इस समूह को दुनिया के खतरनाक साइबर अपराधी नेटवर्क में गिना जाता है।

पहले भी बड़ी कंपनियां बन चुकी हैं निशाना
यह पहला मौका नहीं है जब इस समूह का नाम किसी बड़े साइबर हमले से जुड़ा हो। इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के डेटा से समझौता होने के मामले सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, टाटा समूह से जुड़ी कुछ गोपनीय फाइलों को लेकर भी इसी समूह का नाम सामने आया था। उस समय कथित तौर पर बड़ी रकम की फिरौती मांगी गई थी और भुगतान नहीं होने पर डेटा सार्वजनिक करने का दावा किया गया था।

जांच और सुरक्षा उपायों पर टिकी नजर
कुडनकुलम परियोजना से जुड़े डेटा लीक के दावे ने एक बार फिर देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकारी एजेंसियों की जांच में क्या सामने आता है और क्या वास्तव में किसी संवेदनशील परमाणु परियोजना का डेटा लीक हुआ है या नहीं।

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परमाणु संयंत्र से जुड़ा संवेदनशील डेटा लीक! 19 हजार गोपनीय दस्तावेज सामने आने के दावे से मचा हड़कंप

By Malay Ojha | Published: 15 July 2026 at 05:07 PM

तमिलनाडु में स्थित देश के सबसे बड़े कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र से जुड़ी बेहद संवेदनशील जानकारियां इंटरनेट पर आने के दावे के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। दावा किया गया है कि करीब 19 हजार गोपनीय दस्तावेज हैकरों के हाथ लग गए हैं। इनमें संयंत्र के कुछ हिस्सों के नक्शे, निरीक्षण रिपोर्ट, बैठकों का रिकॉर्ड, उपकरणों की समीक्षा, बीमा दस्तावेज और सप्लायर से जुड़ी अहम जानकारियां शामिल हैं। हालांकि इन दस्तावेजों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

‘वर्ल्ड लीक्स’ नाम के हैकर समूह ने दावा किया है कि उसके पास मौजूद दस्तावेज उस कंपनी से जुड़े हैं, जो कुडनकुलम परियोजना में ठेकेदार के तौर पर काम कर रही है। हैकरों का कहना है कि उनके पास कुल लाखों फाइलें हैं, जिनमें से करीब 19 हजार दस्तावेज सबसे अधिक संवेदनशील हैं। इन फाइलों में परियोजना से जुड़े कई तकनीकी और प्रशासनिक रिकॉर्ड होने का दावा किया गया है।

रिलायंस ने डेटा में सेंधमारी की पुष्टि की
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अनिल अंबानी समूह की ओर से स्वीकार किया गया है कि उसके कुछ डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाई गई थी। कंपनी के मुताबिक यह डेटा एक बाहरी डेटा सेंटर सेवा प्रदाता ‘योट्टा’ के सर्वर पर रखा गया था। घटना की जानकारी भारत सरकार को भी दे दी गई है। हालांकि कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आखिर कौन-सा डेटा प्रभावित हुआ है और उसकी संवेदनशीलता कितनी है।

दस्तावेजों की सत्यता पर अभी भी सवाल
रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसने लीक होने का दावा किए गए दस्तावेजों की जांच की है। ये फाइलें वर्ष 2016 से 2025 के बीच की बताई जा रही हैं। हालांकि समाचार एजेंसी ने साफ किया है कि वह इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सकी है। ऐसे में फिलहाल यह दावा जांच के दायरे में है।

सुरक्षा विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता
परमाणु सुरक्षा मामलों पर काम करने वाली संस्था के वरिष्ठ अधिकारी निकोलस रोथ का कहना है कि यदि किसी परमाणु परियोजना से जुड़े तकनीकी दस्तावेज गलत हाथों में पहुंचते हैं तो यह सुरक्षा के लिहाज से गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। उनका मानना है कि यह घटना केवल एक कंपनी का मामला नहीं है, बल्कि इससे यह सवाल भी उठता है कि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां साइबर हमलों से निपटने के लिए कितनी तैयार हैं।

कुडनकुलम परियोजना में क्या है रिलायंस की भूमिका?
कुडनकुलम परमाणु बिजली परियोजना देश की सबसे बड़ी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में शामिल है। वर्ष 2018 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को इस परियोजना की तीसरी और चौथी इकाई के डिजाइन और निर्माण का ठेका मिला था। दोनों इकाइयों पर निर्माण कार्य जारी है और इनके वर्ष 2027 तक चालू होने की उम्मीद है। इनके शुरू होने के बाद लगभग दो हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन की क्षमता जुड़ेगी।

फिरौती के लिए डेटा चुराने का आरोप
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ‘वर्ल्ड लीक्स’ ऐसा हैकर समूह माना जाता है जो कंपनियों का डेटा चुराकर बदले में फिरौती मांगता है। यदि मांग पूरी नहीं होती तो वह कथित तौर पर डेटा को सार्वजनिक या डार्क वेब पर जारी कर देता है। इसी वजह से इस समूह को दुनिया के खतरनाक साइबर अपराधी नेटवर्क में गिना जाता है।

पहले भी बड़ी कंपनियां बन चुकी हैं निशाना
यह पहला मौका नहीं है जब इस समूह का नाम किसी बड़े साइबर हमले से जुड़ा हो। इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के डेटा से समझौता होने के मामले सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, टाटा समूह से जुड़ी कुछ गोपनीय फाइलों को लेकर भी इसी समूह का नाम सामने आया था। उस समय कथित तौर पर बड़ी रकम की फिरौती मांगी गई थी और भुगतान नहीं होने पर डेटा सार्वजनिक करने का दावा किया गया था।

जांच और सुरक्षा उपायों पर टिकी नजर
कुडनकुलम परियोजना से जुड़े डेटा लीक के दावे ने एक बार फिर देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की साइबर सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकारी एजेंसियों की जांच में क्या सामने आता है और क्या वास्तव में किसी संवेदनशील परमाणु परियोजना का डेटा लीक हुआ है या नहीं।

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