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सुप्रीम कोर्ट की फटकार से हिल गए दहेज लोभी, अदालत ने पूछ लिया ऐसा सवाल जिसे सुन सब रह गए सन्न

By Malay Ojha | Published: 29 May 2026 at 05:27 PM

दहेज प्रताड़ना और बहू-बेटियों के सम्मान से जुड़े एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि शादी के बाद किसी लड़की और उसके परिवार का अपमान करना बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि जिन लोगों से पैसे लिए जाते हैं, आखिर उन्हें ही अपमानित करने का अधिकार कैसे मिल जाता है।

मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ कर रही थी। अदालत ने आरोपी पति और उसके परिवार की याचिका खारिज करते हुए उन्हें किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायपीठ का मानना था कि ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज के लिए गलत संदेश साबित हो सकता है।

दहेज हत्या और खुदकुशी से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला दहेज हत्या और खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। आरोपी पक्ष अदालत से राहत की मांग कर रहा था, लेकिन सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने लड़के वालों के व्यवहार पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि विवाह के बाद बहू और उसके परिवार को प्रताड़ित करना समाज में बढ़ती चिंताजनक मानसिकता को दर्शाता है।

अदालत ने समाज की सोच पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने समाज में फैली दहेज मानसिकता पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विवाह के बाद लड़की और उसके परिवार का अपमान ही करना है, तो आखिर शादी करने का उद्देश्य क्या रह जाता है। अदालत की इस टिप्पणी को समाज के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है।

धारा 498ए को लेकर भी अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर केवल दहेज प्रताड़ना की धारा लगी है। इस पर अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर संतोष होना चाहिए कि केवल यही धारा लगाई गई है, जिसमें सीमित सजा का प्रावधान है। न्यायपीठ ने साफ संकेत दिया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

आर्थिक शोषण पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के बाद होने वाले आर्थिक शोषण को भी गंभीर समस्या बताया। अदालत ने कहा कि कई मामलों में लड़की और उसके माता-पिता से लगातार पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती है और बाद में उन्हें अपमानित भी किया जाता है। न्यायपीठ ने इसे बेहद शर्मनाक मानसिकता बताया।

बहू-बेटियों के सम्मान की रक्षा के लिए कानून सख्त
अंत में अदालत ने स्पष्ट किया कि देश का कानून अब बहू-बेटियों के सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग है। न्यायपीठ ने कहा कि किसी भी परिवार को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह विवाह के बाद किसी लड़की या उसके परिवार का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न करे।

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सुप्रीम कोर्ट की फटकार से हिल गए दहेज लोभी, अदालत ने पूछ लिया ऐसा सवाल जिसे सुन सब रह गए सन्न

By Malay Ojha | Published: 29 May 2026 at 05:27 PM

दहेज प्रताड़ना और बहू-बेटियों के सम्मान से जुड़े एक गंभीर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा कि शादी के बाद किसी लड़की और उसके परिवार का अपमान करना बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा कि जिन लोगों से पैसे लिए जाते हैं, आखिर उन्हें ही अपमानित करने का अधिकार कैसे मिल जाता है।

मामले की सुनवाई जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ कर रही थी। अदालत ने आरोपी पति और उसके परिवार की याचिका खारिज करते हुए उन्हें किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायपीठ का मानना था कि ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज के लिए गलत संदेश साबित हो सकता है।

दहेज हत्या और खुदकुशी से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला दहेज हत्या और खुदकुशी के लिए उकसाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है। आरोपी पक्ष अदालत से राहत की मांग कर रहा था, लेकिन सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने लड़के वालों के व्यवहार पर गंभीर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि विवाह के बाद बहू और उसके परिवार को प्रताड़ित करना समाज में बढ़ती चिंताजनक मानसिकता को दर्शाता है।

अदालत ने समाज की सोच पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने समाज में फैली दहेज मानसिकता पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विवाह के बाद लड़की और उसके परिवार का अपमान ही करना है, तो आखिर शादी करने का उद्देश्य क्या रह जाता है। अदालत की इस टिप्पणी को समाज के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है।

धारा 498ए को लेकर भी अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल पर केवल दहेज प्रताड़ना की धारा लगी है। इस पर अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बात पर संतोष होना चाहिए कि केवल यही धारा लगाई गई है, जिसमें सीमित सजा का प्रावधान है। न्यायपीठ ने साफ संकेत दिया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

आर्थिक शोषण पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने विवाह के बाद होने वाले आर्थिक शोषण को भी गंभीर समस्या बताया। अदालत ने कहा कि कई मामलों में लड़की और उसके माता-पिता से लगातार पैसे ऐंठने की कोशिश की जाती है और बाद में उन्हें अपमानित भी किया जाता है। न्यायपीठ ने इसे बेहद शर्मनाक मानसिकता बताया।

बहू-बेटियों के सम्मान की रक्षा के लिए कानून सख्त
अंत में अदालत ने स्पष्ट किया कि देश का कानून अब बहू-बेटियों के सम्मान की रक्षा के लिए पूरी तरह सजग है। न्यायपीठ ने कहा कि किसी भी परिवार को यह अधिकार नहीं दिया जा सकता कि वह विवाह के बाद किसी लड़की या उसके परिवार का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न करे।

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