By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 27 May 2026 at 11:58 AM
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे पूरी तरह वैध करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव आयोग ने अपनी संवैधानिक शक्तियों के भीतर रहकर काम किया है और किसी भी प्रकार की गैर-संवैधानिक गतिविधि नहीं की गई है।
अदालत ने कहा कि एसआईआर के दौरान अपनाए गए कदम आवश्यक और परिस्थितियों के अनुरूप थे। वोटर पर खुद को साबित करने का अतिरिक्त बोझ डालने की दलील को भी कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया।
वोटर लिस्ट और निवास संबंधी दलीलों पर कोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने पुराने निवास स्थान से अलग रह रहा है, तब भी उसका नाम पुरानी प्रक्रिया में शामिल रह सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नाम हटाना नियमों के खिलाफ नहीं माना जा सकता।
दस्तावेजों की जांच को बताया जरूरी प्रक्रिया
कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग दस्तावेजों की विश्वसनीयता के आधार पर मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का निर्णय ले सकता है। इसे मनमाना नहीं कहा जा सकता।
नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग नागरिकता तय नहीं करता। यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेज संदिग्ध पाए जाते हैं, तो मामला केंद्र सरकार को भेजा जा सकता है।
प्रक्रिया को संविधान के अनुरूप बताया
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया संविधान और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की कसौटी पर पूरी तरह खरी उतरती है।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज
याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि यह प्रक्रिया चुनाव आयोग की शक्तियों से आगे बढ़कर है और इससे नागरिकता साबित करने का बोझ बढ़ता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।
मतदाता सूची अपडेट पर अंतिम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची को व्यवस्थित और अद्यतन रखने के लिए नियम बनाने और लागू करने का पूरा अधिकार है।

