Sunday, May 31, 2026

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गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजा और गंवा दिए 12 लाख रुपये, आप न करें ये गलती

By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 31 May 2026 at 10:55 AM

डिजिटल सुविधाओं ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। अब घर बैठे टिकट बुक करने से लेकर सामान मंगाने और शिकायत दर्ज कराने तक लगभग हर काम कुछ मिनटों में हो जाता है। लेकिन तकनीक की इसी दुनिया में साइबर अपराधी भी लगातार नए-नए तरीके खोज रहे हैं। हाल के दिनों में इंटरनेट पर दिखाई देने वाले फर्जी कस्टमर केयर नंबर लोगों के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आए हैं। कई लोग बिना जांच-पड़ताल के इन नंबरों पर भरोसा कर लेते हैं और भारी आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हो जाते हैं।

हाल ही में सामने आया एक मामला इस खतरे की गंभीरता को साफ दिखाता है। एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को एक पार्सल भेजना था। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर संबंधित कंपनी का सहायता नंबर खोजा। सर्च परिणाम में दिखाई देने वाले नंबर को उन्होंने सही समझकर संपर्क कर लिया। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह नंबर असली नहीं बल्कि साइबर ठगों द्वारा तैयार किए गए जाल का हिस्सा था।

एक साधारण कॉल से शुरू हुआ खेल
जानकारी के अनुसार बातचीत के दौरान उन्हें बताया गया कि पार्सल की घर से उठान सेवा के लिए एक छोटी रकम जमा करनी होगी। रकम बहुत कम होने के कारण उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। भुगतान की प्रक्रिया पूरी होते ही ठगों ने अगला कदम उठाया और उनके मोबाइल पर एक फाइल भेज दी।

मोबाइल में फाइल डालते ही बदला पूरा मामला
ठगों ने दावा किया कि भेजी गई फाइल पार्सल की स्थिति जानने और सेवा को सक्रिय करने के लिए जरूरी है। भरोसा कर अधिकारी ने वह फाइल अपने मोबाइल में स्थापित कर ली। यहीं से पूरा खेल शुरू हुआ। फाइल स्थापित होते ही साइबर अपराधियों को उनके मोबाइल तक पहुंच मिल गई और बैंकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उनके हाथ लग गई।

कुछ ही मिनटों में खाते से उड़ गए लाखों रुपये
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पीड़ित को शुरुआत में किसी गड़बड़ी का अंदाजा तक नहीं हुआ। लेकिन थोड़ी ही देर में उनके खाते से बड़ी रकम निकल गई। जब तक उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तब तक लगभग 12 लाख रुपये उनके खाते से गायब हो चुके थे। यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी कितनी तेजी और योजनाबद्ध तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं।

सर्च परिणाम में ऊपर दिखने वाले नंबर भी हो सकते हैं फर्जी
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अब इंटरनेट पर नकली वेबसाइट और फर्जी सहायता नंबरों को प्रमुख स्थान पर दिखाने के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी का सहायता नंबर खोजता है तो कई बार असली नंबर के बजाय ठगों द्वारा डाला गया नंबर सामने आ जाता है। लोग उसे आधिकारिक समझकर संपर्क कर लेते हैं और जाल में फंस जाते हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले
इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भरता भी बढ़ी है। ज्यादातर लोग किसी समस्या के समाधान के लिए सीधे इंटरनेट का सहारा लेते हैं। इसी आदत का फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं। वे लोगों की जल्दबाजी और जानकारी की कमी को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लेते हैं।

ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी सहायता नंबर पर संपर्क करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। यदि किसी कंपनी से संपर्क करना है तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल अनुप्रयोग या आधिकारिक दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी का ही उपयोग करें। इंटरनेट पर दिखाई देने वाले हर नंबर को सही मान लेना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

अनजान फाइल से रहें दूर
मोबाइल पर आने वाली किसी भी संदिग्ध फाइल या अनजान अनुप्रयोग को स्थापित करने से बचना चाहिए। चाहे वह संदेश के जरिए आए या किसी अन्य माध्यम से, बिना पुष्टि किए उसे खोलना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार ऐसी फाइलों के जरिए मोबाइल का नियंत्रण सीधे अपराधियों तक पहुंच जाता है।

साइबर ठगी होने पर क्या करें
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में देरी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए और तत्काल संबंधित एजेंसियों को जानकारी देनी चाहिए।

एक छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबत
आज के दौर में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह हर इंटरनेट उपयोगकर्ता की जरूरत बन चुकी है। एक गलत नंबर पर किया गया फोन, एक अनजान फाइल पर किया गया क्लिक या बिना जांच के दी गई जानकारी आपकी वर्षों की कमाई को खतरे में डाल सकती है। इसलिए सतर्क रहें, जानकारी की पुष्टि करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें।

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गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजा और गंवा दिए 12 लाख रुपये, आप न करें ये गलती

By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 31 May 2026 at 10:55 AM

डिजिटल सुविधाओं ने लोगों की जिंदगी को पहले से कहीं ज्यादा आसान बना दिया है। अब घर बैठे टिकट बुक करने से लेकर सामान मंगाने और शिकायत दर्ज कराने तक लगभग हर काम कुछ मिनटों में हो जाता है। लेकिन तकनीक की इसी दुनिया में साइबर अपराधी भी लगातार नए-नए तरीके खोज रहे हैं। हाल के दिनों में इंटरनेट पर दिखाई देने वाले फर्जी कस्टमर केयर नंबर लोगों के लिए बड़ा खतरा बनकर सामने आए हैं। कई लोग बिना जांच-पड़ताल के इन नंबरों पर भरोसा कर लेते हैं और भारी आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हो जाते हैं।

हाल ही में सामने आया एक मामला इस खतरे की गंभीरता को साफ दिखाता है। एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को एक पार्सल भेजना था। इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर संबंधित कंपनी का सहायता नंबर खोजा। सर्च परिणाम में दिखाई देने वाले नंबर को उन्होंने सही समझकर संपर्क कर लिया। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह नंबर असली नहीं बल्कि साइबर ठगों द्वारा तैयार किए गए जाल का हिस्सा था।

एक साधारण कॉल से शुरू हुआ खेल
जानकारी के अनुसार बातचीत के दौरान उन्हें बताया गया कि पार्सल की घर से उठान सेवा के लिए एक छोटी रकम जमा करनी होगी। रकम बहुत कम होने के कारण उन्हें किसी तरह का संदेह नहीं हुआ। भुगतान की प्रक्रिया पूरी होते ही ठगों ने अगला कदम उठाया और उनके मोबाइल पर एक फाइल भेज दी।

मोबाइल में फाइल डालते ही बदला पूरा मामला
ठगों ने दावा किया कि भेजी गई फाइल पार्सल की स्थिति जानने और सेवा को सक्रिय करने के लिए जरूरी है। भरोसा कर अधिकारी ने वह फाइल अपने मोबाइल में स्थापित कर ली। यहीं से पूरा खेल शुरू हुआ। फाइल स्थापित होते ही साइबर अपराधियों को उनके मोबाइल तक पहुंच मिल गई और बैंकिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उनके हाथ लग गई।

कुछ ही मिनटों में खाते से उड़ गए लाखों रुपये
मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पीड़ित को शुरुआत में किसी गड़बड़ी का अंदाजा तक नहीं हुआ। लेकिन थोड़ी ही देर में उनके खाते से बड़ी रकम निकल गई। जब तक उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ, तब तक लगभग 12 लाख रुपये उनके खाते से गायब हो चुके थे। यह घटना बताती है कि साइबर अपराधी कितनी तेजी और योजनाबद्ध तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं।

सर्च परिणाम में ऊपर दिखने वाले नंबर भी हो सकते हैं फर्जी
विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर ठग अब इंटरनेट पर नकली वेबसाइट और फर्जी सहायता नंबरों को प्रमुख स्थान पर दिखाने के लिए विशेष तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। जब कोई व्यक्ति किसी कंपनी का सहायता नंबर खोजता है तो कई बार असली नंबर के बजाय ठगों द्वारा डाला गया नंबर सामने आ जाता है। लोग उसे आधिकारिक समझकर संपर्क कर लेते हैं और जाल में फंस जाते हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले
इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़ने के साथ ही ऑनलाइन सेवाओं पर निर्भरता भी बढ़ी है। ज्यादातर लोग किसी समस्या के समाधान के लिए सीधे इंटरनेट का सहारा लेते हैं। इसी आदत का फायदा साइबर अपराधी उठा रहे हैं। वे लोगों की जल्दबाजी और जानकारी की कमी को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लेते हैं।

ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी सहायता नंबर पर संपर्क करने से पहले उसकी पुष्टि जरूर करें। यदि किसी कंपनी से संपर्क करना है तो उसकी आधिकारिक वेबसाइट, मोबाइल अनुप्रयोग या आधिकारिक दस्तावेजों में उपलब्ध जानकारी का ही उपयोग करें। इंटरनेट पर दिखाई देने वाले हर नंबर को सही मान लेना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

अनजान फाइल से रहें दूर
मोबाइल पर आने वाली किसी भी संदिग्ध फाइल या अनजान अनुप्रयोग को स्थापित करने से बचना चाहिए। चाहे वह संदेश के जरिए आए या किसी अन्य माध्यम से, बिना पुष्टि किए उसे खोलना खतरनाक साबित हो सकता है। कई बार ऐसी फाइलों के जरिए मोबाइल का नियंत्रण सीधे अपराधियों तक पहुंच जाता है।

साइबर ठगी होने पर क्या करें
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो तुरंत शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जितनी जल्दी सूचना दी जाएगी, रकम वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में देरी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए और तत्काल संबंधित एजेंसियों को जानकारी देनी चाहिए।

एक छोटी लापरवाही बन सकती है बड़ी मुसीबत
आज के दौर में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह हर इंटरनेट उपयोगकर्ता की जरूरत बन चुकी है। एक गलत नंबर पर किया गया फोन, एक अनजान फाइल पर किया गया क्लिक या बिना जांच के दी गई जानकारी आपकी वर्षों की कमाई को खतरे में डाल सकती है। इसलिए सतर्क रहें, जानकारी की पुष्टि करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें।

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