By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 29 May 2026 at 10:53 PM
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर ईरान को वैश्विक स्तर पर राहत चाहिए, तो उसे हमेशा के लिए परमाणु हथियार बनाने की महत्वाकांक्षा छोड़नी होगी। ट्रंप के इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में हलचल तेज हो गई है और दुनिया की नजरें अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिक गई हैं।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द खोला जाएगा ताकि समुद्री व्यापार सामान्य हो सके। हालांकि इसके साथ उन्होंने कई सख्त शर्तें भी रख दीं। ट्रंप ने कहा कि ईरान को यह स्वीकार करना होगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार तैयार नहीं करेगा। इसके अलावा समुद्री मार्ग में लगाए गए किसी भी तरह के विस्फोटक उपकरणों को भी हटाना होगा ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से शुरू हो सके।
सिचुएशन रूम में हुई अहम बैठक
ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सिचुएशन रूम में लंबी बैठक की है। इस बैठक में ईरान से जुड़े अंतिम फैसले पर चर्चा हुई। अमेरिकी प्रशासन अब उन सभी बिंदुओं पर विचार कर रहा है, जिनके जरिए ईरान के साथ किसी संभावित समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके। हालांकि अभी तक दोनों देशों के बीच किसी आधिकारिक समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है बड़ा असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई होती है। अगर इस मार्ग में तनाव बढ़ता है, तो उसका असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। यही वजह है कि अमेरिका इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट खत्म करना चाहता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने समुद्र में मौजूद कई खतरनाक माइंस को निष्क्रिय कर दिया है।
ईरान ने भी दिखाए कड़े तेवर
दूसरी तरफ ईरान की ओर से भी आक्रामक बयान सामने आए हैं। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट पर कहा गया कि ईरान बातचीत से ज्यादा अपनी सैन्य ताकत पर भरोसा करता है। पोस्ट में साफ कहा गया कि रियायतें बातचीत से नहीं बल्कि मिसाइलों के दम पर हासिल की जाती हैं। इस बयान ने यह संकेत दे दिया है कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने के मूड में नहीं है।
भरोसे की कमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
ईरान की तरफ से यह भी कहा गया कि उसे किसी भी मौखिक आश्वासन या गारंटी पर भरोसा नहीं है। वहां की सरकार केवल जमीन पर दिखाई देने वाले कदमों को ही असली पैमाना मानती है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है। जानकारों का मानना है कि अगर यह स्थिति ज्यादा समय तक बनी रही, तो क्षेत्र में फिर से बड़े संघर्ष का खतरा पैदा हो सकता है।
परमाणु सामग्री को लेकर भी बड़ा दावा
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पिछले वर्ष अमेरिकी हमले में ईरान के कई भूमिगत ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा था। उन्होंने कहा कि वहां मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री अब मलबे के नीचे दब चुकी है। ट्रंप के मुताबिक अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी मिलकर इस सामग्री को नष्ट करने की दिशा में काम करेंगे। हालांकि इस दावे पर अभी तक ईरान की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दुनिया की बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। वैश्विक बाजारों से लेकर ऊर्जा आपूर्ति तक, हर क्षेत्र पर इसका असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर दोनों देशों के बीच जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो पश्चिम एशिया में हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं। फिलहाल दुनिया इस इंतजार में है कि आने वाले दिनों में ट्रंप और ईरान की सरकार क्या अगला कदम उठाती है।

