By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 30 May 2026 at 07:26 AM
देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनधारकों की नजरें इन दिनों आठवें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। इसी बीच रेलवे के तकनीकी पर्यवेक्षकों के संगठन आईआरटीएसए ने सरकार के सामने ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसने वेतन बढ़ोतरी को लेकर नई बहस छेड़ दी है। संगठन का कहना है कि सभी कर्मचारियों के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू करने की पुरानी व्यवस्था अब बदलनी चाहिए और कर्मचारियों के वेतन स्तर के अनुसार अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर तय किए जाने चाहिए।
अब तक वेतन आयोगों में आमतौर पर सभी कर्मचारियों के लिए एक ही फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाता रहा है। सातवें वेतन आयोग में भी यही व्यवस्था अपनाई गई थी, जहां 2.57 का एक समान फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। लेकिन आईआरटीएसए का मानना है कि अलग-अलग जिम्मेदारियों और वेतन स्तर वाले कर्मचारियों के लिए एक जैसा फार्मूला पूरी तरह न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
पांच श्रेणियों में बांटने का सुझाव
संगठन ने अपने प्रस्ताव में कर्मचारियों को पांच अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर फिटमेंट फैक्टर तय करने की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार लेवल-1 से लेवल-5 तक के कर्मचारियों के लिए 2.92 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया जाए। वहीं लेवल-6 से लेवल-8 तक के कर्मचारियों के लिए 3.50, लेवल-9 से लेवल-12 तक के लिए 3.80, लेवल-13 से लेवल-16 तक के लिए 4.09 और सबसे ऊंचे लेवल-17 तथा लेवल-18 के कर्मचारियों के लिए 4.38 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया गया है।
तकनीकी कर्मचारियों के लिए अलग कैडर संरचना की मांग
आईआरटीएसए ने केवल फिटमेंट फैक्टर की बात ही नहीं की है, बल्कि रेलवे के तकनीकी पर्यवेक्षकों के लिए नए कैडर ढांचे का भी सुझाव दिया है। संगठन का कहना है कि तकनीकी कर्मचारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों को देखते हुए उनके वेतनमान में व्यापक सुधार किया जाना चाहिए।
प्रस्ताव के अनुसार जूनियर इंजीनियर के लिए शुरुआती वेतन 1.57 लाख रुपये से अधिक, वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर के लिए लगभग 1.67 लाख रुपये, सहायक प्रबंधक के लिए 2 लाख रुपये से अधिक, प्रबंधक के लिए 2.13 लाख रुपये तथा वरिष्ठ प्रबंधक के लिए 2.57 लाख रुपये तक शुरुआती वेतन निर्धारित करने की मांग की गई है।
आखिर क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह गुणक होता है जिसकी मदद से कर्मचारियों की नई मूल सैलरी तय की जाती है। जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो मौजूदा मूल वेतन को तय फिटमेंट फैक्टर से गुणा कर नई सैलरी निर्धारित की जाती है। इसी वजह से फिटमेंट फैक्टर को वेतन वृद्धि का सबसे अहम आधार माना जाता है।
कितनी बढ़ सकती है सैलरी?
यदि संगठन के प्रस्ताव को उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो 20 हजार रुपये मूल वेतन पाने वाले कर्मचारी की सैलरी 2.92 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर करीब 58,400 रुपये तक पहुंच सकती है। इसी तरह 45 हजार रुपये मूल वेतन वाले कर्मचारी के लिए 3.50 फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर वेतन लगभग 1.57 लाख रुपये तक जा सकता है।
वहीं उच्च वेतन स्तर के कर्मचारियों को इससे और अधिक लाभ मिल सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी कर्मचारी का मूल वेतन 1.20 लाख रुपये है और उस पर 4.09 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो उसका संशोधित वेतन लगभग 4.90 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि ये केवल अनुमानित गणनाएं हैं और इन्हें अंतिम वेतन निर्धारण नहीं माना जा सकता।
सरकार की ओर से क्या है स्थिति?
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें तैयार होने और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही किसी अंतिम निर्णय की तस्वीर साफ होगी। ऐसे में कर्मचारियों को अभी इंतजार करना होगा।
कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ीं
आईआरटीएसए के इस प्रस्ताव ने एक बार फिर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच उम्मीदों को बढ़ा दिया है। यदि सरकार अलग-अलग स्तरों के लिए अलग फिटमेंट फैक्टर के विचार पर गंभीरता से विचार करती है तो वेतन संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले महीनों में आठवें वेतन आयोग से जुड़ी हर गतिविधि पर लाखों कर्मचारियों और पेंशनधारकों की नजर बनी रहने वाली है।

