By Malay Ojha | Published: 31 May 2026 at 03:45 PM
अमेरिका और ईरान के बीच कई हफ्तों से चल रही अहम बातचीत अब एक नए और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच तैयार किए गए संभावित शांति समझौते के मसौदे को लेकर अब गंभीर संशोधनों की मांग सामने आई है, जिसके बाद पूरा मामला फिर से अनिश्चितता में चला गया है।
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मसौदे में कई अहम बदलाव सुझाए हैं, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हिस्से को लेकर। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि केवल सामान्य आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि स्पष्ट शर्तें और समयसीमा जरूरी है।
परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम बना सबसे बड़ा विवाद
वार्ता के केंद्र में सबसे संवेदनशील मुद्दा ईरान का संवर्धित यूरेनियम भंडार है। मौजूदा प्रस्ताव में ईरान यह भरोसा दे रहा है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन अमेरिका इस आश्वासन को पर्याप्त नहीं मान रहा है।
अमेरिकी पक्ष यह जानना चाहता है कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम का भविष्य क्या होगा, उसे कब तक हटाया जाएगा और उस प्रक्रिया पर अमेरिका की कितनी निगरानी होगी।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, अब चर्चा केवल वादों की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई और समयबद्ध योजना की है। यही वजह है कि समझौते का यह हिस्सा सबसे ज्यादा विवादित बन गया है।
जलमार्ग सुरक्षा पर भी ट्रंप की सख्त मांग
इस समझौते में केवल परमाणु मुद्दा ही नहीं, बल्कि समुद्री मार्गों से जुड़ी सुरक्षा शर्तें भी अहम बन गई हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खुला और बिना किसी बाधा के रहे।
पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर असर पड़ा है। अमेरिका इस स्थिति को किसी भी तरह दोबारा नहीं देखना चाहता, इसलिए वह समझौते में और कड़ी भाषा जोड़ने पर जोर दे रहा है।
समझौते की समयसीमा और बढ़ती कूटनीतिक हलचल
प्रस्तावित योजना के अनुसार, लगभग साठ दिनों की एक विशेष अवधि तय की गई है, जिसमें परमाणु गतिविधियों, प्रतिबंधों में राहत और निगरानी व्यवस्था जैसे मुद्दों पर अंतिम सहमति बननी है।
हालांकि इस प्रक्रिया की शुरुआत से पहले ही यूरेनियम भंडार का मुद्दा सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ गया है। बातचीत अब सीधे प्रतिनिधियों की बजाय मध्यस्थों के जरिए आगे बढ़ रही है, जिससे प्रक्रिया और धीमी हो गई है।
क्या समझौता सच में होगा या फिर टल जाएगा?
एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने उम्मीद जताई है कि समझौता अंततः हो जाएगा, लेकिन समय को लेकर स्पष्टता नहीं है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया कुछ दिनों में भी पूरी हो सकती है या थोड़ा और समय भी लग सकता है।
उधर, ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि समझौता लगभग तैयार है और इसके तहत विदेशों में फंसे अरबों डॉलर के धन तक ईरान की पहुंच संभव हो सकती है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने इन दावों की पुष्टि नहीं की है।
डील के करीब लेकिन अंतिम मंजिल दूर
कुल मिलाकर स्थिति यह है कि दोनों देशों के बीच सहमति की दूरी कम जरूर हुई है, लेकिन अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए अभी कई बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। ट्रंप की सख्त शर्तों ने बातचीत को एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर कदम बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
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