National

spot_img

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल, अब बोले- जवाबदेही की शुरुआत… CJP ने भी किया बड़ा ऐलान

By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 08:30 AM

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। 23 जुलाई को अनशन समाप्त करने के बाद अब उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि भूख हड़ताल भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन जवाबदेही की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि सरकार और अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसदों से उन्हें भरोसा मिला है कि देश की खराब होती परीक्षा व्यवस्था और उसमें जवाबदेही के सवाल पर संसद में चर्चा होगी।

वांगचुक के मुताबिक, सरकार की ओर से उन्हें यह भी भरोसा दिया गया है कि हाल में सामने आए नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने का भी आश्वासन मिलने की बात उन्होंने कही है। इन आश्वासनों के बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया।

सरकार से मिले भरोसे के बाद लिया फैसला
वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर पिछले कई दिनों से सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर चल रहा था। उनका आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, प्रश्नपत्र लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर था। इसी बीच उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ रही थी। 26 दिनों तक चले अनशन के बाद आखिरकार सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के आधार पर उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त कर दी।

‘जवाबदेही की शुरुआत’ वाले संदेश ने खींचा ध्यान
अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने सुबह सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपने समर्थकों और छात्रों को संदेश दिया। उनके संदेश का सबसे अहम हिस्सा यही रहा कि भूख हड़ताल समाप्त करना आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अब परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की लड़ाई संसद और राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ सकती है। यही वजह है कि उनके नए संदेश को आंदोलन के अगले चरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

CJP ने कहा- जंतर-मंतर पर विरोध जारी रहेगा
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी ने वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म होने पर राहत और खुशी जताई है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि उसका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि जंतर-मंतर पर उसका शांतिपूर्ण विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते।

अभिजीत दिपके ने वांगचुक को बताया असाधारण साहस का प्रतीक
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में सोनम वांगचुक को उनके साहस और त्याग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि 26 दिनों तक अपनी जान जोखिम में डालकर वांगचुक ने पूरे देश की अंतरात्मा को जगाने का काम किया। दिपके ने यह भी कहा कि वांगचुक की जान देश के लिए बहुत कीमती है और इसी वजह से उनके अनशन के खत्म होने से उन्हें राहत और खुशी है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर CJP कायम
हालांकि, वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक मांग वापस नहीं ली है। संगठन का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों की राजनीतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना चाहिए। यही मांग पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे उसके विरोध प्रदर्शन के केंद्र में रही है।

संसद में परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा की उम्मीद
वांगचुक ने अपने संदेश में जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह संसद में परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही पर चर्चा है। उनका कहना है कि उन्हें सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से भरोसा मिला है कि देश की परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही समस्याओं पर संसद के भीतर चर्चा की जाएगी। अगर ऐसा होता है तो यह मुद्दा सिर्फ सड़क पर चल रहे विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था के भीतर भी चर्चा का विषय बन सकता है।

नीट प्रश्नपत्र लीक और छात्रों का मुद्दा फिर केंद्र में
पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि में नीट परीक्षा से जुड़ा प्रश्नपत्र लीक और छात्रों के भविष्य पर उठे सवाल हैं। परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता पैदा की। प्रदर्शनकारियों की मांग रही है कि परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जाए तथा अगर किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए।

26 दिन का अनशन क्यों बना बड़ा मुद्दा?
सोनम वांगचुक ने 28 जून से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका आंदोलन उस समय और ज्यादा चर्चा में आया, जब वह जंतर-मंतर पर चल रहे युवाओं के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सामने आए। उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल नीतियां बनाने से नहीं होगा, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही भी तय करनी होगी। इसी मांग को लेकर उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।

आंदोलन के दौरान बढ़ता गया राजनीतिक दबाव
वांगचुक के अनशन के दौरान परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होती गई। विपक्षी दलों ने भी कई मौकों पर छात्रों के मुद्दे और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। इस बीच जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन ने भी व्यापक राजनीतिक ध्यान खींचा। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लगातार उठती रही।

प्रदर्शन अब किस दिशा में जाएगा?
सोनम वांगचुक की 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म हो चुकी है, लेकिन उनके अपने शब्दों में जवाबदेही की लड़ाई अब शुरू हुई है। एक तरफ सरकार की ओर से मिले आश्वासनों को आगे लागू करने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संसद में परीक्षा व्यवस्था और जवाबदेही के मुद्दे पर वास्तव में क्या चर्चा होती है और सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कितना आगे बढ़ती है।

वांगचुक के फैसले के बाद अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर
फिलहाल सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करके सरकार को बातचीत और संसद में चर्चा का मौका दिया है। लेकिन उनके संदेश और कॉकरोच जनता पार्टी के रुख से साफ है कि परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा अभी शांत नहीं हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार की ओर से दिए गए भरोसे कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं और क्या छात्रों, प्रश्नपत्र लीक से प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई ठोस फैसला लिया जाता है। वांगचुक के लिए 26 दिन का अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उनके शब्दों में कहें तो **जवाबदेही की असली परीक्षा अब शुरू हुई है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

International

spot_img

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल, अब बोले- जवाबदेही की शुरुआत… CJP ने भी किया बड़ा ऐलान

By Malay Ojha | Published: 24 July 2026 at 08:30 AM

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चली अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की उनकी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। 23 जुलाई को अनशन समाप्त करने के बाद अब उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा कि भूख हड़ताल भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन जवाबदेही की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि सरकार और अलग-अलग राजनीतिक दलों के सांसदों से उन्हें भरोसा मिला है कि देश की खराब होती परीक्षा व्यवस्था और उसमें जवाबदेही के सवाल पर संसद में चर्चा होगी।

वांगचुक के मुताबिक, सरकार की ओर से उन्हें यह भी भरोसा दिया गया है कि हाल में सामने आए नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक से प्रभावित होकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा। इसके अलावा शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने का भी आश्वासन मिलने की बात उन्होंने कही है। इन आश्वासनों के बाद उन्होंने अपना अनशन खत्म करने का फैसला किया।

सरकार से मिले भरोसे के बाद लिया फैसला
वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर पिछले कई दिनों से सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दौर चल रहा था। उनका आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, प्रश्नपत्र लीक और छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर था। इसी बीच उनकी तबीयत को लेकर भी चिंता बढ़ रही थी। 26 दिनों तक चले अनशन के बाद आखिरकार सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के आधार पर उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त कर दी।

‘जवाबदेही की शुरुआत’ वाले संदेश ने खींचा ध्यान
अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने सुबह सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर अपने समर्थकों और छात्रों को संदेश दिया। उनके संदेश का सबसे अहम हिस्सा यही रहा कि भूख हड़ताल समाप्त करना आंदोलन का अंत नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि अब परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की लड़ाई संसद और राजनीतिक प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ सकती है। यही वजह है कि उनके नए संदेश को आंदोलन के अगले चरण के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

CJP ने कहा- जंतर-मंतर पर विरोध जारी रहेगा
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी ने वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म होने पर राहत और खुशी जताई है, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि उसका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि जंतर-मंतर पर उसका शांतिपूर्ण विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते।

अभिजीत दिपके ने वांगचुक को बताया असाधारण साहस का प्रतीक
अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में सोनम वांगचुक को उनके साहस और त्याग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि 26 दिनों तक अपनी जान जोखिम में डालकर वांगचुक ने पूरे देश की अंतरात्मा को जगाने का काम किया। दिपके ने यह भी कहा कि वांगचुक की जान देश के लिए बहुत कीमती है और इसी वजह से उनके अनशन के खत्म होने से उन्हें राहत और खुशी है।

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर CJP कायम
हालांकि, वांगचुक के अनशन खत्म करने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक मांग वापस नहीं ली है। संगठन का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों की राजनीतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना चाहिए। यही मांग पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर चल रहे उसके विरोध प्रदर्शन के केंद्र में रही है।

संसद में परीक्षा व्यवस्था पर चर्चा की उम्मीद
वांगचुक ने अपने संदेश में जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह संसद में परीक्षा व्यवस्था को लेकर जवाबदेही पर चर्चा है। उनका कहना है कि उन्हें सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से भरोसा मिला है कि देश की परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही समस्याओं पर संसद के भीतर चर्चा की जाएगी। अगर ऐसा होता है तो यह मुद्दा सिर्फ सड़क पर चल रहे विरोध तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश की सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था के भीतर भी चर्चा का विषय बन सकता है।

नीट प्रश्नपत्र लीक और छात्रों का मुद्दा फिर केंद्र में
पूरे आंदोलन की पृष्ठभूमि में नीट परीक्षा से जुड़ा प्रश्नपत्र लीक और छात्रों के भविष्य पर उठे सवाल हैं। परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता पैदा की। प्रदर्शनकारियों की मांग रही है कि परीक्षा व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जाए तथा अगर किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए।

26 दिन का अनशन क्यों बना बड़ा मुद्दा?
सोनम वांगचुक ने 28 जून से अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका आंदोलन उस समय और ज्यादा चर्चा में आया, जब वह जंतर-मंतर पर चल रहे युवाओं के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सामने आए। उनका कहना था कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार केवल नीतियां बनाने से नहीं होगा, बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही भी तय करनी होगी। इसी मांग को लेकर उन्होंने अपना अनशन जारी रखा।

आंदोलन के दौरान बढ़ता गया राजनीतिक दबाव
वांगचुक के अनशन के दौरान परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज होती गई। विपक्षी दलों ने भी कई मौकों पर छात्रों के मुद्दे और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। इस बीच जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन ने भी व्यापक राजनीतिक ध्यान खींचा। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग लगातार उठती रही।

प्रदर्शन अब किस दिशा में जाएगा?
सोनम वांगचुक की 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म हो चुकी है, लेकिन उनके अपने शब्दों में जवाबदेही की लड़ाई अब शुरू हुई है। एक तरफ सरकार की ओर से मिले आश्वासनों को आगे लागू करने की चुनौती होगी, तो दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर अपना विरोध जारी रखने का ऐलान किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि संसद में परीक्षा व्यवस्था और जवाबदेही के मुद्दे पर वास्तव में क्या चर्चा होती है और सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कितना आगे बढ़ती है।

वांगचुक के फैसले के बाद अब सबकी नजर आगे की कार्रवाई पर
फिलहाल सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म करके सरकार को बातचीत और संसद में चर्चा का मौका दिया है। लेकिन उनके संदेश और कॉकरोच जनता पार्टी के रुख से साफ है कि परीक्षा व्यवस्था का मुद्दा अभी शांत नहीं हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार की ओर से दिए गए भरोसे कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं और क्या छात्रों, प्रश्नपत्र लीक से प्रभावित परिवारों और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर कोई ठोस फैसला लिया जाता है। वांगचुक के लिए 26 दिन का अनशन भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन उनके शब्दों में कहें तो **जवाबदेही की असली परीक्षा अब शुरू हुई है।

📢 बड़ी खबर आते ही सबसे पहले जानना चाहते हैं?
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।

WhatsApp चैनल जॉइन करें
Breaking Hindi News और ताज़ा अपडेट्स पाएं सबसे पहले Aryavarta Live पर। यहां आपको भारत, पाकिस्तान, अमेरिका समेत दुनिया भर की महत्वपूर्ण खबरें मिलेंगी। खेल, मनोरंजन, व्यापार, टेक्नोलॉजी, क्राइम, उत्तर प्रदेश और बिहार की हर बड़ी खबर पढ़ने के लिए जुड़े रहें Aryavarta Live के साथ।

National

spot_img

International

spot_img
RELATED ARTICLES