By Malay Ojha | Published: 20 October 2026 at 09:45 PM
पटना। विजयादशमी पर मंगलवार को पटना के गांधी मैदान में 72वें रावण वध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भगवान श्रीराम के जयकारों और रंग-बिरंगी आतिशबाजी के बीच 90 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन हुआ। इससे पहले 85 फीट के कुंभकर्ण और 80 फीट के मेघनाथ के पुतलों को जलाया गया। इस दौरान गांधी मैदान में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे।
रावण का पुतला जलते ही गूंजा जय श्रीराम
रावण वध देखने के लिए लोग दोपहर से ही गांधी मैदान पहुंचने लगे थे। रामलीला की टीम भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के साथ रथ पर सवार होकर मैदान पहुंची। राम की सेना और वानरों की टोली के आगमन पर दर्शकों ने जय श्रीराम के नारे लगाए। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, लोगों का उत्साह भी बढ़ता गया।
आधे में धीमी पड़ गई रावण के पुतले की आग
पुतलों के दहन से पहले दो मंजिला सोने की लंका का दृश्य दिखाया गया। रामायण के प्रसंग के अनुसार, हनुमान जी ने वानर सेना के साथ लंका में आग लगाई। इसके बाद आतिशबाजी का शानदार नजारा देखने को मिला। आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी बिखरने लगी और दर्शक इस पल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करते नजर आए।
बच्चों ने रावण दहन से जोड़ दिया अच्छाई का संदेश
रावण का पुतला जलने के दौरान एक समय ऐसा आया, जब आधा जलने के बाद आग की रफ्तार धीमी पड़ गई। दर्शक पुतले के पूरी तरह जलने का इंतजार करते रहे। इस दृश्य को देखकर बच्चों ने अपने अंदाज में बुराई और अच्छाई का संदेश समझाया। उनका कहना था कि बुराई चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह हमेशा नहीं टिक सकती। आखिरकार उसे सत्य और अच्छाई के सामने हारना ही पड़ता है।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री भी कार्यक्रम में हुए शामिल
गांधी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और नागालैंड के राज्यपाल नंदकिशोर यादव समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की आरती उतारी गई, तिलक लगाया गया और उनका अभिनंदन किया गया।
1955 से चली आ रही है रावण वध की परंपरा
पटना के गांधी मैदान में रावण वध कार्यक्रम की परंपरा वर्ष 1955 से चली आ रही है। आयोजकों ने पिछले साल बारिश के कारण पुतले के दहन से पहले गिर जाने की घटना को ध्यान में रखते हुए इस बार तीनों पुतलों में लोहे का मजबूत ढांचा लगाया था।
सुरक्षा के लिए किए गए थे विशेष इंतजाम
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के इंतजाम किए थे। गांधी मैदान के प्रवेश द्वारों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात किए गए थे। महिलाओं के लिए अलग दर्शक दीर्घाओं की व्यवस्था भी की गई थी।
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