By Malay Ojha | Published: 22 May 2026 at 01:17 PM
बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड और आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड के बीच राज्य में इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन परियोजनाओं के लिए टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली मॉडल के तहत समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य राज्य में एक मजबूत, आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क विकसित करना है।
इस मौके पर ऊर्जा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2025 से 2030 के बीच बिहार में औद्योगिक क्रांति लाना है। उन्होंने कहा कि उद्योगों की नींव बिजली पर आधारित होती है, इसलिए ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस नई पहल से पीरपैंती पावर प्लांट के उत्पादन को ट्रांसमिशन नेटवर्क में शामिल किया जाएगा, जिससे राज्य में बिजली आपूर्ति और अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनेगी। इसका सीधा लाभ उद्योगों और निवेशकों को मिलेगा।
आत्मनिर्भर बिहार की दिशा में बड़ा कदम
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य बिहार को इतना मजबूत बनाना है कि यहां से बाहर गए लोग भी वापस आकर उद्योग स्थापित करें। यह समझौता राज्य की मजबूत और आधुनिक विद्युत अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निजी निवेश और समयबद्ध परियोजनाओं पर जोर
ऊर्जा विभाग के सचिव ने बताया कि इस साझेदारी से पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया को बढ़ावा मिलेगा। इससे परियोजनाएं समय पर पूरी होंगी, लागत में संतुलन रहेगा और कार्य क्षमता में वृद्धि होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस मॉडल से निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड को इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए नामित किया गया है।
बड़ी ट्रांसमिशन परियोजनाओं में विशेषज्ञता
आरईसी लिमिटेड के कार्यपालक निदेशक ने बताया कि यह पहल राज्य के लिए ऐतिहासिक है। उन्होंने कहा कि कंपनी अब तक देशभर में दर्जनों अंतर-राज्यीय और राज्य स्तरीय ट्रांसमिशन परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल ही में आयोजित कार्यशाला में बिहार सरकार और निजी डेवलपर्स के बीच टीबीसीबी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा हुई थी, जिसका परिणाम यह समझौता है।
47 ग्रिड सबस्टेशन का लक्ष्य
बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक ने बताया कि राज्य ऊर्जा विभाग लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है। आने वाले दस वर्षों में 47 नए ग्रिड सबस्टेशन बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
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