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Manna Dey Story: पहलवान से बने अमर गायक, ऐसे पड़ा था मन्ना डे नाम

By Malay Ojha | Published: 01 May 2026 at 09:34 AM

मन्ना डे को दुनिया एक महान singer के रूप में जानती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह युवावस्था में पहलवानी करते थे। कोलकाता के अखाड़ों में उन्होंने दांव-पेंच सीखे और नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया। उन्हें पतंग उड़ाने का भी शौक था और मुंबई में Mohammed Rafi के साथ पतंगबाजी किया करते थे।

शुरुआती जीवन और संघर्ष
मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। संगीत से लगाव बचपन से था, लेकिन करियर की राह आसान नहीं थी। संघर्ष के दिनों में उन्हें अपने चाचा K. C. Dey के पास मुंबई आने का मौका मिला, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।

फिल्मों में पहला मौका कैसे मिला
मुंबई आने के बाद उन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ली। फिल्मों में उन्हें शुरुआती मौके 1940 के दशक में मिले। Tamanna में उन्होंने “जागो आई उषा पंछी बोले” गाया। इसके बाद Ram Rajya में पहली बार एकल गीत गाने का अवसर मिला।

सफलता देर से मिली, लेकिन यादगार मिली
जब मन्ना डे ने singing शुरू की, उस समय Mukesh और Mohammed Rafi का दौर तेजी से बढ़ रहा था। ऐसे समय में नए singer के लिए जगह बनाना आसान नहीं था।

साल 1950 में Mashal के गीत “ऊपर गगन विशाल” ने उन्हें नई पहचान दिलाई। इसके बाद संगीतकारों को समझ आया कि उनकी आवाज खास और अलग है।

राज कपूर को क्यों पसंद थे मन्ना डे
Raj Kapoor अपनी फिल्मों में अक्सर Mukesh से गाने गवाते थे, लेकिन मन्ना डे की आवाज भी उन्हें बेहद पसंद थी। यही कारण था कि उनकी फिल्मों में एक खास गीत मन्ना डे की आवाज में जरूर होता था।

उनके यादगार गीतों में “प्यार हुआ इकरार हुआ”, “ये रात भीगी भीगी”, “लागा चुनरी में दाग” और “चलत मुसाफिर मोह लिया रे” जैसे अमर songs शामिल हैं।

थीम सॉन्ग की पहली पसंद बने
मन्ना डे की आवाज गंभीर, मजबूत और शास्त्रीय आधार वाली थी। इसी वजह से उन्हें अक्सर title song, theme song और विशेष गीतों के लिए चुना जाता था। Manoj Kumar ने भी अपनी फिल्मों में उनकी आवाज का प्रभावशाली उपयोग किया।

मन्ना डे नाम कैसे पड़ा
प्रबोध चंद्र डे को घर में प्यार से “माना” कहकर बुलाया जाता था। जब वह मुंबई आए, तब उनके चाचा K. C. Dey ने सलाह दी कि फिल्म जगत में छोटा और याद रहने वाला नाम रखना चाहिए।

इसके बाद “माना” से “मन्ना” बना और दुनिया उन्हें मन्ना डे के नाम से जानने लगी। यही नाम आगे चलकर अमर हो गया।

आज भी अमर हैं उनके गीत
समय बदला, संगीत बदला, लेकिन मन्ना डे की आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है। फिल्मी गीतों से लेकर Madhushala जैसी प्रस्तुतियों तक, उन्होंने अपनी गायकी से इतिहास रच दिया।

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Manna Dey Story: पहलवान से बने अमर गायक, ऐसे पड़ा था मन्ना डे नाम

By Malay Ojha | Published: 01 May 2026 at 09:34 AM

मन्ना डे को दुनिया एक महान singer के रूप में जानती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह युवावस्था में पहलवानी करते थे। कोलकाता के अखाड़ों में उन्होंने दांव-पेंच सीखे और नेशनल लेवल की प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा लिया। उन्हें पतंग उड़ाने का भी शौक था और मुंबई में Mohammed Rafi के साथ पतंगबाजी किया करते थे।

शुरुआती जीवन और संघर्ष
मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र डे था। संगीत से लगाव बचपन से था, लेकिन करियर की राह आसान नहीं थी। संघर्ष के दिनों में उन्हें अपने चाचा K. C. Dey के पास मुंबई आने का मौका मिला, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।

फिल्मों में पहला मौका कैसे मिला
मुंबई आने के बाद उन्होंने शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा ली। फिल्मों में उन्हें शुरुआती मौके 1940 के दशक में मिले। Tamanna में उन्होंने “जागो आई उषा पंछी बोले” गाया। इसके बाद Ram Rajya में पहली बार एकल गीत गाने का अवसर मिला।

सफलता देर से मिली, लेकिन यादगार मिली
जब मन्ना डे ने singing शुरू की, उस समय Mukesh और Mohammed Rafi का दौर तेजी से बढ़ रहा था। ऐसे समय में नए singer के लिए जगह बनाना आसान नहीं था।

साल 1950 में Mashal के गीत “ऊपर गगन विशाल” ने उन्हें नई पहचान दिलाई। इसके बाद संगीतकारों को समझ आया कि उनकी आवाज खास और अलग है।

राज कपूर को क्यों पसंद थे मन्ना डे
Raj Kapoor अपनी फिल्मों में अक्सर Mukesh से गाने गवाते थे, लेकिन मन्ना डे की आवाज भी उन्हें बेहद पसंद थी। यही कारण था कि उनकी फिल्मों में एक खास गीत मन्ना डे की आवाज में जरूर होता था।

उनके यादगार गीतों में “प्यार हुआ इकरार हुआ”, “ये रात भीगी भीगी”, “लागा चुनरी में दाग” और “चलत मुसाफिर मोह लिया रे” जैसे अमर songs शामिल हैं।

थीम सॉन्ग की पहली पसंद बने
मन्ना डे की आवाज गंभीर, मजबूत और शास्त्रीय आधार वाली थी। इसी वजह से उन्हें अक्सर title song, theme song और विशेष गीतों के लिए चुना जाता था। Manoj Kumar ने भी अपनी फिल्मों में उनकी आवाज का प्रभावशाली उपयोग किया।

मन्ना डे नाम कैसे पड़ा
प्रबोध चंद्र डे को घर में प्यार से “माना” कहकर बुलाया जाता था। जब वह मुंबई आए, तब उनके चाचा K. C. Dey ने सलाह दी कि फिल्म जगत में छोटा और याद रहने वाला नाम रखना चाहिए।

इसके बाद “माना” से “मन्ना” बना और दुनिया उन्हें मन्ना डे के नाम से जानने लगी। यही नाम आगे चलकर अमर हो गया।

आज भी अमर हैं उनके गीत
समय बदला, संगीत बदला, लेकिन मन्ना डे की आवाज आज भी करोड़ों लोगों के दिलों में जिंदा है। फिल्मी गीतों से लेकर Madhushala जैसी प्रस्तुतियों तक, उन्होंने अपनी गायकी से इतिहास रच दिया।

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