By Malay Ojha | Published: 20 May 2026 at 07:07 AM
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के कुछ दिन बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी बीजिंग पहुंच गए। दोनों नेताओं के स्वागत को लेकर चीन की ओर से अपनाए गए राजनयिक प्रोटोकॉल अब वैश्विक चर्चा का विषय बन गए हैं। बीजिंग से लेकर मॉस्को और वाशिंगटन तक इस बात पर बहस छिड़ गई है कि आखिर चीन ने किस नेता को ज्यादा अहमियत दी।
डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई के बीच चीन दौरे पर पहुंचे थे। उनके साथ रक्षा और विदेश मामलों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। बीजिंग एयरपोर्ट पर ट्रंप के स्वागत के लिए रेड कार्पेट बिछाई गई थी। उन्हें रिसीव करने चीन के उपराष्ट्रपति पहुंचे थे, जबकि विदेश विभाग के उप मंत्री भी एयरपोर्ट पर मौजूद रहे।
जिनपिंग और ट्रंप के बीच हुई अहम बातचीत
चीन यात्रा के दौरान ट्रंप ने राष्ट्रपति जिनपिंग से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों और संभावित समझौतों पर बातचीत हुई, हालांकि आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई। मुलाकात के आखिर में जिनपिंग ट्रंप को एक खास गार्डन में लेकर गए, जिसकी चर्चा भी काफी हुई।
पुतिन के स्वागत में बदला प्रोटोकॉल
ट्रंप की यात्रा के करीब एक सप्ताह बाद रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 19 मई को चीन पहुंचे। पुतिन के स्वागत के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी खुद एयरपोर्ट पहुंचे। उनके साथ रूस के विदेश मंत्री लावरोव और कई उद्योगपति भी बीजिंग पहुंचे हैं।
रूस और चीन के बीच होंगे कई समझौते
चीन दौरे के दौरान पुतिन और जिनपिंग के बीच करीब 40 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की बात कही जा रही है। इनमें चीन और रूस के बीच रेल सेवा से जुड़ा बड़ा समझौता भी शामिल बताया जा रहा है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट पर खींची लाल रेखा
पुतिन के साथ बातचीत में जिनपिंग ने वैश्विक व्यवस्था और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भी अपनी बात रखी। दोनों नेताओं ने बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मामलों में पश्चिमी देशों के दबाव का अप्रत्यक्ष रूप से विरोध भी दिखाई दिया।
दुनिया की नजर चीन की रणनीति पर
ट्रंप और पुतिन, दोनों के स्वागत में चीन की ओर से किए गए प्रोटोकॉल बदलाव अब राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गए हैं। कई विशेषज्ञ इसे चीन की कूटनीतिक रणनीति और वैश्विक संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।
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