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CJP नेताओं की पेशी के बाद सौरभ दास की चेतावनी, बोले- ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तय

By Malay Ojha | Published: 23 October 2026 at 05:36 PM

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका शुक्रवार, 23 अक्टूबर को एक बार फिर दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश हुए। दोनों नेताओं से उनके खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों में पूछताछ की गई। पेशी के बाद सौरभ दास ने मीडिया और अन्य लोगों से चल रही कार्यवाही की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर उनकी ओर से भी कार्रवाई की जा सकती है।

सौरभ दास ने थाने के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कार्यकारी अदालत में चल रही कार्यवाही का सभी को सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि CJP फिलहाल इस मामले से जुड़ी जानकारी मीडिया के साथ साझा नहीं कर रही है। ऐसे में जो लोग कार्यवाही से जुड़ी जानकारी बाहर ला रहे हैं, उन्हें भी जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए। सौरभ ने साफ कहा कि मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है।

आगे के आंदोलन पर सभी मिलकर लेंगे फैसला
CJP के सह संयोजक ने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति पर फैसला केवल पार्टी नहीं करेगी। इससे जुड़े सभी लोगों के साथ चर्चा के बाद अगला कदम तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में कई लोग शामिल हैं और भविष्य की योजना बनाने में उनकी राय भी महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान सौरभ दास ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तय है।

तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद फिर पेशी
सौरभ दास और आशुतोष रांका बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों को लिखित आश्वासन देने के बाद रिहा करने का आदेश दिया था। दोनों नेताओं ने भरोसा दिया था कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जंतर-मंतर को कानूनी रूप से धरना स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार भी पेश करने का निर्देश दिया गया था।

13 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद दोनों नेताओं के खिलाफ निवारक कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस को आशंका थी कि प्रदर्शन के कारण शांति भंग हो सकती है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्यवाही की गई। इस प्रदर्शन में CJP के सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई थी। मामले की जांच जारी है।

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CJP नेताओं की पेशी के बाद सौरभ दास की चेतावनी, बोले- ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तय

By Malay Ojha | Published: 23 October 2026 at 05:36 PM

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका शुक्रवार, 23 अक्टूबर को एक बार फिर दिल्ली के मंदिर मार्ग पुलिस थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश हुए। दोनों नेताओं से उनके खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों में पूछताछ की गई। पेशी के बाद सौरभ दास ने मीडिया और अन्य लोगों से चल रही कार्यवाही की मर्यादा बनाए रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर उनकी ओर से भी कार्रवाई की जा सकती है।

सौरभ दास ने थाने के बाहर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कार्यकारी अदालत में चल रही कार्यवाही का सभी को सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि CJP फिलहाल इस मामले से जुड़ी जानकारी मीडिया के साथ साझा नहीं कर रही है। ऐसे में जो लोग कार्यवाही से जुड़ी जानकारी बाहर ला रहे हैं, उन्हें भी जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए। सौरभ ने साफ कहा कि मामले को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जा सकती है।

आगे के आंदोलन पर सभी मिलकर लेंगे फैसला
CJP के सह संयोजक ने कहा कि आंदोलन की आगे की रणनीति पर फैसला केवल पार्टी नहीं करेगी। इससे जुड़े सभी लोगों के साथ चर्चा के बाद अगला कदम तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन में कई लोग शामिल हैं और भविष्य की योजना बनाने में उनकी राय भी महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान सौरभ दास ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा तय है।

तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद फिर पेशी
सौरभ दास और आशुतोष रांका बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा हुए थे। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों को लिखित आश्वासन देने के बाद रिहा करने का आदेश दिया था। दोनों नेताओं ने भरोसा दिया था कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जंतर-मंतर को कानूनी रूप से धरना स्थल घोषित किए जाने तक वहां प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और जमानतदार भी पेश करने का निर्देश दिया गया था।

13 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद दोनों नेताओं के खिलाफ निवारक कार्रवाई शुरू की थी। पुलिस को आशंका थी कि प्रदर्शन के कारण शांति भंग हो सकती है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत कार्यवाही की गई। इस प्रदर्शन में CJP के सदस्यों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई थी। मामले की जांच जारी है।

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