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आरजेडी को बड़ा झटका! तेजस्वी यादव के करीबी मृत्युंजय तिवारी ने छोड़ी पार्टी, बोले- ‘दीमक जैसे लोगों ने कर दिया बर्बाद’

By Malay Ojha | Published: 16 July 2026 at 10:24 PM

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के तुरंत बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर खुलकर नाराजगी जताई और कहा कि तेजस्वी यादव ऐसे लोगों से घिरे हैं जिन्होंने संगठन को अंदर ही अंदर दीमक की तरह खोखला कर दिया है। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल में सियासी हलचल तेज कर दी है।

पार्टी के भीतर लंबे समय से सक्रिय और तेजस्वी यादव के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले मृत्युंजय तिवारी का अचानक अलग होना आरजेडी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर भी कई सवाल खड़े हो सकते हैं।

सम्मान नहीं मिला, इसलिए छोड़नी पड़ी पार्टी
इस्तीफे के बाद मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि अब पार्टी में समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई बार अपनी शिकायतें वरिष्ठ नेताओं और तेजस्वी यादव तक पहुंचाईं, लेकिन किसी स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई। उनका कहना है कि जब लगातार उपेक्षा और अपमान झेलना पड़े तो ऐसे माहौल में राजनीति करना संभव नहीं रह जाता।

‘दीमक जैसे लोगों ने संगठन को नुकसान पहुंचाया’
मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के कुछ नेताओं पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आरजेडी के भीतर ऐसे लोग सक्रिय हैं जिन्होंने संगठन को अंदर से कमजोर कर दिया है। उनके मुताबिक यही लोग आज नेतृत्व के सबसे करीब हैं और उनकी वजह से समर्पित कार्यकर्ताओं की कोई पूछ नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोगों के बीच ही फैसले होंगे तो पार्टी का भविष्य बेहतर नहीं हो सकता।

बुरे दौर में भी नहीं छोड़ा था साथ
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए तिवारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी का साथ उस समय भी नहीं छोड़ा, जब संगठन कठिन दौर से गुजर रहा था। उन्होंने बताया कि वर्ष दो हजार चौदह में राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उन्हें प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। उस जिम्मेदारी को उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ निभाया और हर बड़े राजनीतिक मुद्दे पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा।

मीडिया में पार्टी की मजबूत आवाज रहे
मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक आरजेडी का चेहरा बनकर मीडिया में पार्टी का पक्ष रखते रहे। टेलीविजन बहसों से लेकर प्रेस वार्ताओं तक उन्होंने संगठन की नीतियों का लगातार बचाव किया। युवाओं को पार्टी से जोड़ने और राजनीतिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। इसी वजह से उनका इस्तीफा सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा है।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर
मृत्युंजय तिवारी का राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। छात्र जीवन में ही उन्होंने सामाजिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े और अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व क्षमता तथा संगठनात्मक अनुभव के दम पर पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में जगह बनाई। समय के साथ वह पार्टी के भरोसेमंद नेताओं की सूची में शामिल हो गए।

अगले कदम पर अभी कायम है सस्पेंस
इस्तीफा देने के बाद भी मृत्युंजय तिवारी ने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने यह भी साफ नहीं किया कि वह किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे या फिलहाल स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका निभाएंगे। हालांकि, उनके इस्तीफे और बयानों ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में उनका अगला फैसला क्या होगा।

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आरजेडी को बड़ा झटका! तेजस्वी यादव के करीबी मृत्युंजय तिवारी ने छोड़ी पार्टी, बोले- ‘दीमक जैसे लोगों ने कर दिया बर्बाद’

By Malay Ojha | Published: 16 July 2026 at 10:24 PM

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के तुरंत बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर खुलकर नाराजगी जताई और कहा कि तेजस्वी यादव ऐसे लोगों से घिरे हैं जिन्होंने संगठन को अंदर ही अंदर दीमक की तरह खोखला कर दिया है। उनके इस बयान ने चुनावी माहौल में सियासी हलचल तेज कर दी है।

पार्टी के भीतर लंबे समय से सक्रिय और तेजस्वी यादव के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले मृत्युंजय तिवारी का अचानक अलग होना आरजेडी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इससे पार्टी के अंदरूनी हालात को लेकर भी कई सवाल खड़े हो सकते हैं।

सम्मान नहीं मिला, इसलिए छोड़नी पड़ी पार्टी
इस्तीफे के बाद मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि अब पार्टी में समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कई बार अपनी शिकायतें वरिष्ठ नेताओं और तेजस्वी यादव तक पहुंचाईं, लेकिन किसी स्तर पर उनकी बात नहीं सुनी गई। उनका कहना है कि जब लगातार उपेक्षा और अपमान झेलना पड़े तो ऐसे माहौल में राजनीति करना संभव नहीं रह जाता।

‘दीमक जैसे लोगों ने संगठन को नुकसान पहुंचाया’
मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के कुछ नेताओं पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आरजेडी के भीतर ऐसे लोग सक्रिय हैं जिन्होंने संगठन को अंदर से कमजोर कर दिया है। उनके मुताबिक यही लोग आज नेतृत्व के सबसे करीब हैं और उनकी वजह से समर्पित कार्यकर्ताओं की कोई पूछ नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे लोगों के बीच ही फैसले होंगे तो पार्टी का भविष्य बेहतर नहीं हो सकता।

बुरे दौर में भी नहीं छोड़ा था साथ
अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए तिवारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी का साथ उस समय भी नहीं छोड़ा, जब संगठन कठिन दौर से गुजर रहा था। उन्होंने बताया कि वर्ष दो हजार चौदह में राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने उन्हें प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी थी। उस जिम्मेदारी को उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ निभाया और हर बड़े राजनीतिक मुद्दे पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा।

मीडिया में पार्टी की मजबूत आवाज रहे
मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक आरजेडी का चेहरा बनकर मीडिया में पार्टी का पक्ष रखते रहे। टेलीविजन बहसों से लेकर प्रेस वार्ताओं तक उन्होंने संगठन की नीतियों का लगातार बचाव किया। युवाओं को पार्टी से जोड़ने और राजनीतिक मुद्दों को प्रभावी ढंग से रखने में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही। इसी वजह से उनका इस्तीफा सामान्य राजनीतिक घटना नहीं माना जा रहा है।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर
मृत्युंजय तिवारी का राजनीतिक जीवन छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। छात्र जीवन में ही उन्होंने सामाजिक और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में राष्ट्रीय जनता दल से जुड़े और अपनी प्रभावशाली वक्तृत्व क्षमता तथा संगठनात्मक अनुभव के दम पर पार्टी के प्रमुख प्रवक्ताओं में जगह बनाई। समय के साथ वह पार्टी के भरोसेमंद नेताओं की सूची में शामिल हो गए।

अगले कदम पर अभी कायम है सस्पेंस
इस्तीफा देने के बाद भी मृत्युंजय तिवारी ने अपने अगले राजनीतिक कदम का खुलासा नहीं किया है। उन्होंने यह भी साफ नहीं किया कि वह किसी दूसरी पार्टी में शामिल होंगे या फिलहाल स्वतंत्र राजनीतिक भूमिका निभाएंगे। हालांकि, उनके इस्तीफे और बयानों ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा जरूर छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में उनका अगला फैसला क्या होगा।

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