By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 30 May 2026 at 03:38 PM
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी को पटना स्थित उनके लंबे समय से आवंटित सरकारी आवास को खाली करने का निर्देश दिया गया है। भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी नोटिस के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। नोटिस मिलने के बाद राबड़ी देवी ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वह घर खाली नहीं करेंगी और यदि सरकार को आवास खाली कराना है तो फोर्स बुलाकर कार्रवाई करे।
पटना के वीआईपी क्षेत्र में स्थित 10 सर्कुलर रोड का यह सरकारी आवास केवल एक घर नहीं रहा है। बीते करीब दो दशकों में यह राष्ट्रीय जनता दल की राजनीति का अहम केंद्र बन चुका है। पार्टी के कई बड़े फैसले, महत्वपूर्ण बैठकें और रणनीतिक चर्चाएं इसी परिसर में होती रही हैं। यही वजह है कि यह बंगला केवल राबड़ी देवी या लालू परिवार से नहीं, बल्कि पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं और नेताओं की भावनाओं से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।
पहले भी भेजा जा चुका है नोटिस
यह पहला मौका नहीं है जब इस आवास को लेकर विवाद सामने आया हो। इससे पहले नवंबर 2025 में भी प्रशासन की ओर से राबड़ी देवी को आवास खाली करने का नोटिस दिया गया था। उस समय भी इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली थी। अब एक बार फिर नया नोटिस जारी होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है।
सरकार ने बताया नियमों के तहत कार्रवाई
सरकारी सूत्रों के अनुसार राबड़ी देवी को सलाह दी गई है कि वह बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते उन्हें आवंटित 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास में स्थानांतरित हो जाएं। सरकार का कहना है कि आवास आवंटन से जुड़े नियमों के अनुसार यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और सभी जनप्रतिनिधियों को तय नियमों का पालन करना चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बनाए गए नियम सभी के लिए समान हैं और जनप्रतिनिधियों को इनका पालन करना चाहिए। उनका कहना था कि पूर्व में भी ऐसे नोटिस जारी किए जाते रहे हैं और इसे नियमों के दायरे में ही देखा जाना चाहिए।
आरजेडी ने सरकार पर लगाया राजनीतिक बदले की भावना का आरोप
राष्ट्रीय जनता दल ने इस कार्रवाई को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह केवल आवास का मामला नहीं बल्कि विपक्ष को दबाव में लेने की कोशिश है। पार्टी प्रवक्ता शक्ति यादव ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस कदम से सत्ता के शीर्ष स्तर पर बढ़ते राजनीतिक प्रभाव की झलक दिखाई देती है।
रोहिणी आचार्य ने भी जताई थी नाराजगी
राबड़ी देवी की बेटी रोहिणी आचार्य भी पहले इस तरह के नोटिस पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुकी हैं। उन्होंने सामाजिक माध्यमों पर लिखे एक संदेश में कहा था कि लालू प्रसाद को अपमानित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी व्यक्ति को सरकारी आवास से हटाया जा सकता है, लेकिन जनता के दिलों में बनी उसकी जगह को नहीं छीना जा सकता।
क्या बनेगा नया राजनीतिक मुद्दा?
आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह मामला राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर सरकार इसे नियमों के पालन से जोड़कर देख रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे सम्मान और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का विषय बना रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक गरमा सकता है। फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राबड़ी देवी आगे क्या कदम उठाती हैं और सरकार इस मामले में किस तरह की कार्रवाई करती है।

