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मदर्स डे: बिना आईवीएफ भी मां बन रहीं महिलाएं, पटना का यह अस्पताल बना उम्मीद की नई किरण

By Malay Ojha | Published: 09 May 2026 at 11:16 PM

मदर्स डे के मौके पर जहां पूरी दुनिया मां के त्याग और ममता को सलाम कर रही है, वहीं राजधानी पटना का एक अस्पताल उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है, जिनके घर वर्षों से बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी थी। कंकड़बाग स्थित पटना वूमेन हॉस्पिटल एंड फर्टिलिटी रिसर्च सेंटर आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से कई निःसंतान दंपतियों का सपना पूरा कर रहा है।

अस्पताल में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार और फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. कुमारी अनुराग की देखरेख में ऐसे उपचार किए जा रहे हैं, जिनसे कई महिलाओं को बिना आईवीएफ के भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में सफलता मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब हर मामले में आईवीएफ ही अंतिम विकल्प नहीं रह गया है।

दूरबीन सर्जरी बन रही वरदान
डॉक्टरों के मुताबिक आधुनिक गायनी दूरबीन सर्जरी के जरिए एंडोमेट्रियोसिस, ट्यूबल ब्लॉकेज, फाइब्रॉइड और ओवरी से जुड़ी कई जटिल समस्याओं का इलाज सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इस तकनीक में बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना भी बढ़ जाती है।

बिहार से नेपाल तक पहुंच रही आधुनिक चिकित्सा
डॉ. संजीव कुमार केवल मरीजों का इलाज ही नहीं कर रहे, बल्कि बिहार, झारखंड और नेपाल के कई स्त्री रोग विशेषज्ञों को आधुनिक दूरबीन सर्जरी की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। उनकी इस पहल से छोटे शहरों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद मिल रही है।

पुरुष बांझपन पर भी हो रहा गंभीर काम
फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. कुमारी अनुराग का कहना है कि संतान न होने के मामलों में केवल महिलाओं को जिम्मेदार मानना गलत है। कई मामलों में पुरुष बांझपन भी बड़ा कारण बनता है। आधुनिक जांच और उपचार पद्धतियों के जरिए ऐसे दंपतियों के लिए नई उम्मीद तैयार की जा रही है।

दूर-दराज से इलाज के लिए पहुंच रहे मरीज
अस्पताल में आधुनिक फर्टिलिटी सर्जरी और नई उपचार तकनीकों की वजह से बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड और नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। यहां उन दंपतियों को भी सफलता मिल रही है, जिन्हें पहले सीधे आईवीएफ की सलाह दी जाती थी।

मदर्स डे पर कई परिवारों के लिए बनी नई उम्मीद
मदर्स डे के अवसर पर यह अस्पताल उन परिवारों के लिए उम्मीद और खुशियों का प्रतीक बन चुका है, जो लंबे समय से मातृत्व और पितृत्व के सुख का इंतजार कर रहे थे। आधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और समर्पित चिकित्सा सेवाओं के दम पर यह संस्थान निःसंतानता के खिलाफ एक नई चिकित्सा कहानी लिख रहा है।

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मदर्स डे: बिना आईवीएफ भी मां बन रहीं महिलाएं, पटना का यह अस्पताल बना उम्मीद की नई किरण

By Malay Ojha | Published: 09 May 2026 at 11:16 PM

मदर्स डे के मौके पर जहां पूरी दुनिया मां के त्याग और ममता को सलाम कर रही है, वहीं राजधानी पटना का एक अस्पताल उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है, जिनके घर वर्षों से बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी थी। कंकड़बाग स्थित पटना वूमेन हॉस्पिटल एंड फर्टिलिटी रिसर्च सेंटर आधुनिक चिकित्सा तकनीकों की मदद से कई निःसंतान दंपतियों का सपना पूरा कर रहा है।

अस्पताल में वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार और फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. कुमारी अनुराग की देखरेख में ऐसे उपचार किए जा रहे हैं, जिनसे कई महिलाओं को बिना आईवीएफ के भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण करने में सफलता मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब हर मामले में आईवीएफ ही अंतिम विकल्प नहीं रह गया है।

दूरबीन सर्जरी बन रही वरदान
डॉक्टरों के मुताबिक आधुनिक गायनी दूरबीन सर्जरी के जरिए एंडोमेट्रियोसिस, ट्यूबल ब्लॉकेज, फाइब्रॉइड और ओवरी से जुड़ी कई जटिल समस्याओं का इलाज सफलतापूर्वक किया जा रहा है। इस तकनीक में बड़े चीरे की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावना भी बढ़ जाती है।

बिहार से नेपाल तक पहुंच रही आधुनिक चिकित्सा
डॉ. संजीव कुमार केवल मरीजों का इलाज ही नहीं कर रहे, बल्कि बिहार, झारखंड और नेपाल के कई स्त्री रोग विशेषज्ञों को आधुनिक दूरबीन सर्जरी की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। उनकी इस पहल से छोटे शहरों और सीमावर्ती क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद मिल रही है।

पुरुष बांझपन पर भी हो रहा गंभीर काम
फर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. कुमारी अनुराग का कहना है कि संतान न होने के मामलों में केवल महिलाओं को जिम्मेदार मानना गलत है। कई मामलों में पुरुष बांझपन भी बड़ा कारण बनता है। आधुनिक जांच और उपचार पद्धतियों के जरिए ऐसे दंपतियों के लिए नई उम्मीद तैयार की जा रही है।

दूर-दराज से इलाज के लिए पहुंच रहे मरीज
अस्पताल में आधुनिक फर्टिलिटी सर्जरी और नई उपचार तकनीकों की वजह से बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड और नेपाल से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। यहां उन दंपतियों को भी सफलता मिल रही है, जिन्हें पहले सीधे आईवीएफ की सलाह दी जाती थी।

मदर्स डे पर कई परिवारों के लिए बनी नई उम्मीद
मदर्स डे के अवसर पर यह अस्पताल उन परिवारों के लिए उम्मीद और खुशियों का प्रतीक बन चुका है, जो लंबे समय से मातृत्व और पितृत्व के सुख का इंतजार कर रहे थे। आधुनिक तकनीक, अनुभवी डॉक्टरों और समर्पित चिकित्सा सेवाओं के दम पर यह संस्थान निःसंतानता के खिलाफ एक नई चिकित्सा कहानी लिख रहा है।

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