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सोशल मीडिया की अफवाह बनी मौत का कारण! कांगो में ‘रहस्यमयी बीमारी’ के डर से 17 लोगों की हत्या

By Malay Ojha | Published: 10 May 2026 at 09:13 AM

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सोशल मीडिया पर फैली एक झूठी अफवाह ने हिंसा का खतरनाक रूप ले लिया। शोपो प्रांत में लोगों के बीच यह डर फैल गया कि पुरुषों के गुप्तांग सिकुड़कर गायब हो रहे हैं। इस अफवाह ने देखते ही देखते भीड़ को इतना उग्र बना दिया कि अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है।

स्थानीय लोगों के बीच यह भी अफवाह फैल गई कि वैक्सीन और स्वास्थ्य कर्मी इस कथित बीमारी के पीछे हैं। इसी डर ने लोगों में गुस्सा भर दिया और कई स्वास्थ्य कर्मी भी हिंसा का शिकार बन गए।

सोशल मीडिया से फैली अफवाह
यह पूरा मामला पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर वीडियो और संदेश तेजी से वायरल होने लगे। इनमें दावा किया गया कि एक रहस्यमयी बीमारी पुरुषों को नपुंसक बना रही है। प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियां जब तक लोगों को सच समझा पातीं, तब तक हालात हिंसक हो चुके थे।

रिसर्च टीम पर हुआ हमला
6 अक्टूबर को इसांगी इलाके के इलम्बी गांव में स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम टीकाकरण से जुड़ी रिसर्च के लिए पहुंची थी। गांव के लोगों ने बाहरी लोगों को देखकर शक जताया और उन्हें बीमारी फैलाने वाला समझ लिया। इसके बाद भीड़ ने टीम पर हमला कर दिया।

भीड़ ने डॉक्टरों को जिंदा मार डाला
हमले में डॉक्टर प्लासाइड म्बुंगी और जॉन तांगाकेया की मौके पर ही हत्या कर दी गई। हमले में बच निकले जीन-क्लाउड म्बाटू ने बताया कि दोनों डॉक्टर लगातार लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्मादी भीड़ ने उनकी एक नहीं सुनी।

कई स्वास्थ्य कर्मियों की गई जान
डॉक्टर तांगाकेया की पत्नी जस्टीन ने बताया कि भीड़ ने उनके पति को जिंदा जला दिया। इसके कुछ ही समय बाद पास के याफिरा गांव में दो अन्य स्वास्थ्य कर्मियों मैथ्यू मोसीसी और केविन इलुंगा की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। अधिकारियों ने साफ किया कि इन स्वास्थ्य कर्मियों का उस कथित बीमारी से कोई संबंध नहीं था।

धार्मिक दावों ने बढ़ाया भ्रम
जांच में सामने आया कि इस अफवाह को सोशल मीडिया और कुछ धार्मिक समूहों ने बढ़ावा दिया। कई वीडियो में पादरी लोगों को ‘चमत्कारी इलाज’ का दावा करते नजर आए। ये वीडियो टिकटॉक और फेसबुक जैसे मंचों पर लाखों बार देखे गए, जिससे लोगों का डर और गहरा होता गया।

पुराने विवादों में भी घिर चुके हैं पादरी
एक पादरी पहले भी कोरोना के इलाज का झूठा दावा करने के मामले में सजा पा चुका था, लेकिन इसके बावजूद उसका प्रभाव कम नहीं हुआ। कई अन्य धार्मिक नेताओं ने भी इसी तरह के दावे करके लोगों को गुमराह किया।

अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई शुरू
प्रशासन ने अब मामले में सख्ती दिखाते हुए करीब एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया है। एक व्यक्ति को अफवाह फैलाने के आरोप में जेल भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा है कि ‘अंग सिकुड़ने’ जैसी कोई बीमारी मौजूद नहीं है।

क्यों बढ़ रहा आधुनिक चिकित्सा पर अविश्वास
विशेषज्ञों का कहना है कि अफ्रीका के कई हिस्सों में आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था को लेकर अविश्वास काफी पुराना है। औपनिवेशिक दौर और विवादित क्लिनिकल परीक्षणों की वजह से कई समुदाय आज भी वैक्सीन और डॉक्टरों पर भरोसा नहीं कर पाते।

अफवाह रोकने में फंड की कमी बड़ी चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्व वाली ‘अफ्रीका इन्फोडेमिक रिस्पांस एलायंस’ गलत सूचनाओं पर नजर रखने का काम कर रही है। हालांकि फंड की कमी के कारण इस तरह की अफवाहों पर तेजी से नियंत्रण करना चुनौती बनता जा रहा है।

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सोशल मीडिया की अफवाह बनी मौत का कारण! कांगो में ‘रहस्यमयी बीमारी’ के डर से 17 लोगों की हत्या

By Malay Ojha | Published: 10 May 2026 at 09:13 AM

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो से एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां सोशल मीडिया पर फैली एक झूठी अफवाह ने हिंसा का खतरनाक रूप ले लिया। शोपो प्रांत में लोगों के बीच यह डर फैल गया कि पुरुषों के गुप्तांग सिकुड़कर गायब हो रहे हैं। इस अफवाह ने देखते ही देखते भीड़ को इतना उग्र बना दिया कि अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है।

स्थानीय लोगों के बीच यह भी अफवाह फैल गई कि वैक्सीन और स्वास्थ्य कर्मी इस कथित बीमारी के पीछे हैं। इसी डर ने लोगों में गुस्सा भर दिया और कई स्वास्थ्य कर्मी भी हिंसा का शिकार बन गए।

सोशल मीडिया से फैली अफवाह
यह पूरा मामला पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुआ, जब सोशल मीडिया पर वीडियो और संदेश तेजी से वायरल होने लगे। इनमें दावा किया गया कि एक रहस्यमयी बीमारी पुरुषों को नपुंसक बना रही है। प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियां जब तक लोगों को सच समझा पातीं, तब तक हालात हिंसक हो चुके थे।

रिसर्च टीम पर हुआ हमला
6 अक्टूबर को इसांगी इलाके के इलम्बी गांव में स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम टीकाकरण से जुड़ी रिसर्च के लिए पहुंची थी। गांव के लोगों ने बाहरी लोगों को देखकर शक जताया और उन्हें बीमारी फैलाने वाला समझ लिया। इसके बाद भीड़ ने टीम पर हमला कर दिया।

भीड़ ने डॉक्टरों को जिंदा मार डाला
हमले में डॉक्टर प्लासाइड म्बुंगी और जॉन तांगाकेया की मौके पर ही हत्या कर दी गई। हमले में बच निकले जीन-क्लाउड म्बाटू ने बताया कि दोनों डॉक्टर लगातार लोगों को समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्मादी भीड़ ने उनकी एक नहीं सुनी।

कई स्वास्थ्य कर्मियों की गई जान
डॉक्टर तांगाकेया की पत्नी जस्टीन ने बताया कि भीड़ ने उनके पति को जिंदा जला दिया। इसके कुछ ही समय बाद पास के याफिरा गांव में दो अन्य स्वास्थ्य कर्मियों मैथ्यू मोसीसी और केविन इलुंगा की भी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। अधिकारियों ने साफ किया कि इन स्वास्थ्य कर्मियों का उस कथित बीमारी से कोई संबंध नहीं था।

धार्मिक दावों ने बढ़ाया भ्रम
जांच में सामने आया कि इस अफवाह को सोशल मीडिया और कुछ धार्मिक समूहों ने बढ़ावा दिया। कई वीडियो में पादरी लोगों को ‘चमत्कारी इलाज’ का दावा करते नजर आए। ये वीडियो टिकटॉक और फेसबुक जैसे मंचों पर लाखों बार देखे गए, जिससे लोगों का डर और गहरा होता गया।

पुराने विवादों में भी घिर चुके हैं पादरी
एक पादरी पहले भी कोरोना के इलाज का झूठा दावा करने के मामले में सजा पा चुका था, लेकिन इसके बावजूद उसका प्रभाव कम नहीं हुआ। कई अन्य धार्मिक नेताओं ने भी इसी तरह के दावे करके लोगों को गुमराह किया।

अफवाह फैलाने वालों पर कार्रवाई शुरू
प्रशासन ने अब मामले में सख्ती दिखाते हुए करीब एक दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया है। एक व्यक्ति को अफवाह फैलाने के आरोप में जेल भेजा गया है। स्वास्थ्य विभाग लगातार लोगों को समझाने की कोशिश कर रहा है कि ‘अंग सिकुड़ने’ जैसी कोई बीमारी मौजूद नहीं है।

क्यों बढ़ रहा आधुनिक चिकित्सा पर अविश्वास
विशेषज्ञों का कहना है कि अफ्रीका के कई हिस्सों में आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था को लेकर अविश्वास काफी पुराना है। औपनिवेशिक दौर और विवादित क्लिनिकल परीक्षणों की वजह से कई समुदाय आज भी वैक्सीन और डॉक्टरों पर भरोसा नहीं कर पाते।

अफवाह रोकने में फंड की कमी बड़ी चुनौती
विश्व स्वास्थ्य संगठन के नेतृत्व वाली ‘अफ्रीका इन्फोडेमिक रिस्पांस एलायंस’ गलत सूचनाओं पर नजर रखने का काम कर रही है। हालांकि फंड की कमी के कारण इस तरह की अफवाहों पर तेजी से नियंत्रण करना चुनौती बनता जा रहा है।

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