By Malay Ojha | Published: 21 May 2026 at 07:14 AM
पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले खुले में नमाज और कुर्बानी को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है. आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर के बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है. उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर निशाना साधते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय कुर्बानी के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता नहीं करेगा.
हुमायूं कबीर ने कहा कि अगर कुर्बानी पर रोक लगाने की कोशिश की गई तो इससे हालात और बिगड़ सकते हैं. उनका कहना था कि बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय गोमांस का सेवन करता है और सरकार को इस मुद्दे पर दोहरा रवैया नहीं अपनाना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश में स्लॉटर हाउस को लाइसेंस दिया गया है और मांस का निर्यात भी होता है, तो फिर केवल कुर्बानी पर विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है.
सड़क पर नमाज को लेकर भी बयान
हुमायूं कबीर ने ईद की नमाज के लिए बड़े मैदान उपलब्ध कराने की मांग भी की. उन्होंने कहा कि अगर पर्याप्त जगह नहीं दी जाएगी तो लोग मजबूरी में सड़कों पर नमाज पढ़ेंगे.
भाजपा ने तुष्टीकरण का लगाया आरोप
वहीं, भाजपा नेताओं ने सड़क पर नमाज को लेकर कड़ा विरोध जताया है. उनका कहना है कि यह मामला किसी धर्म के खिलाफ नहीं बल्कि तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ है. भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि कई इस्लामिक देशों में भी सार्वजनिक सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होती, इसलिए इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
बकरीद से पहले सरकार ने जारी किया सख्त नोटिस
इधर, पश्चिम बंगाल सरकार ने बकरीद से पहले पशु वध को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस का वध नहीं किया जा सकता.
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
सरकारी आदेश के मुताबिक, फिटनेस प्रमाण पत्र पर दो अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर जरूरी होंगे. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की जेल और जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
Aryavarta Live के WhatsApp Channel से जुड़ें और हर महत्वपूर्ण अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।
WhatsApp चैनल जॉइन करें

