By Malay Ojha | Published: 23 May 2026 at 11:05 AM
देश में लगातार बढ़ रही पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। बीते आठ दिनों में तीन बार ईंधन के दाम बढ़ चुके हैं। कई शहरों में पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। राष्ट्रीय राजधानी में 23 मई को पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये प्रति लीटर दर्ज की गई। इसी बीच चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग तेज कर दी है।
चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले भारी टैक्स को खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर ईंधन को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है तो आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
पेट्रोल पर कितना लग रहा टैक्स
चेंबर के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल का वास्तविक मूल्य 66.29 रुपये प्रति लीटर है। इसके ऊपर केंद्र सरकार 11.90 रुपये एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार 16.03 रुपये वैट वसूल रही है। वहीं डीलर मार्जिन 4.42 रुपये प्रति लीटर है। यानी मौजूदा कीमत में करीब 28 रुपये केवल टैक्स के रूप में शामिल हैं।
डीजल पर भी भारी टैक्स का बोझ
डीजल की बात करें तो इसका बेस प्राइस 67.36 रुपये प्रति लीटर है। इस पर 7.80 रुपये एक्साइज ड्यूटी और 13.39 रुपये वैट लगाया जा रहा है। इसके अलावा 3.03 रुपये डीलर मार्जिन भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में डीजल पर भी करीब 24 रुपये टैक्स और मार्जिन के तौर पर वसूले जा रहे हैं।
जीएसटी लागू होने पर कितना सस्ता होगा पेट्रोल
अगर पेट्रोल को 18 फीसदी जीएसटी स्लैब में शामिल किया जाता है तो मौजूदा टैक्स व्यवस्था खत्म हो सकती है। इस स्थिति में 66.29 रुपये के बेस प्राइस पर करीब 11.93 रुपये जीएसटी लगेगा। इसके बाद पेट्रोल की कीमत लगभग 78.22 रुपये प्रति लीटर रह जाएगी। यानी मौजूदा कीमत के मुकाबले करीब 22 रुपये तक राहत मिल सकती है।
वन नेशन वन टैक्स की उठी मांग
बृजेश गोयल का कहना है कि जब देश में जीएसटी लागू किया गया था तब ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की बात कही गई थी। लेकिन पेट्रोल-डीजल अब भी जीएसटी से बाहर हैं। अलग-अलग राज्य अपने हिसाब से वैट वसूलते हैं, जिसकी वजह से हर राज्य में ईंधन की कीमत अलग है। उनका कहना है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने से पूरे देश में कीमतों में एकरूपता आएगी।
आम लोगों पर बढ़ रहा महंगाई का असर
लगातार बढ़ते ईंधन दामों का असर केवल वाहन चालकों पर ही नहीं बल्कि रोजमर्रा की जरूरत की चीजों पर भी पड़ता है। परिवहन खर्च बढ़ने से खाद्य पदार्थों से लेकर अन्य सामानों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग को आम लोगों के लिए राहत से जोड़कर देखा जा रहा है।
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