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NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा, कहा- छात्रों के भरोसे के साथ हो रहा खिलवाड़

By Malay Ojha | Published: 29 May 2026 at 04:30 PM

नीट पेपर लीक मामले को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बताया. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल रहेगा.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि नीट दोबारा परीक्षा से जुड़ी तैयारियों की निगरानी स्वयं प्रधानमंत्री कर रहे हैं. इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ऐसी स्थिति है तो यह बेहद दुखद है. अदालत ने कहा कि यह केवल विद्यार्थियों का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों और वर्षों की मेहनत का मामला है.

अदालत ने राधाकृष्णन कमेटी से भी मांगा जवाब
नीट पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी. इस समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को कई अहम सुझाव दिए थे. शुक्रवार की सुनवाई में अदालत ने पूछा कि जब सिफारिशें लागू कर दी गई थीं, तब फिर पेपर लीक जैसी घटना कैसे हुई.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- निगरानी में कहां हुई चूक?
अदालत ने समिति के अध्यक्ष से पूछा कि कार्यान्वयन की निगरानी कितनी प्रभावी रही और आखिर व्यवस्था में विफलता कैसे सामने आई. इस दौरान अदालत ने संकेत दिए कि केवल सुझाव देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सही निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी है.

राधाकृष्णन कमेटी ने क्या कहा?
डॉ. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति ने कुल 60 सुझाव दिए थे, जिनमें से अधिकतर लागू किए जा चुके हैं. कुछ सुझाव अभी प्रक्रिया में हैं. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 की नीट यूजी परीक्षा संतोषजनक ढंग से आयोजित हुई थी और केवल कुछ परीक्षा केंद्रों पर बिजली बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आई थीं.

“राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को मजबूत करने की दी थी सलाह”
समिति अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की संरचना और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की सिफारिश की थी. हालांकि अदालत ने इस पर जोर दिया कि सबसे बड़ी चिंता पेपर लीक और जिम्मेदारी तय करने की है.

सुप्रीम कोर्ट ने जवाबदेही पर दिया बड़ा संदेश
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि असली समस्या तब तक समाप्त नहीं होगी, जब तक जिम्मेदारी तय नहीं की जाती. अदालत ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि आखिर परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसके कंधों पर है और चूक के लिए कौन उत्तरदायी है.

विद्यार्थियों के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
अदालत ने कहा कि देश के लाखों विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं और ऐसी घटनाएं उनके भविष्य और भरोसे दोनों को प्रभावित करती हैं. इसलिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है.

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By Malay Ojha | Published: 29 May 2026 at 04:30 PM

नीट पेपर लीक मामले को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील बताया. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल रहेगा.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि नीट दोबारा परीक्षा से जुड़ी तैयारियों की निगरानी स्वयं प्रधानमंत्री कर रहे हैं. इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि ऐसी स्थिति है तो यह बेहद दुखद है. अदालत ने कहा कि यह केवल विद्यार्थियों का नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों और वर्षों की मेहनत का मामला है.

अदालत ने राधाकृष्णन कमेटी से भी मांगा जवाब
नीट पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी. इस समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को कई अहम सुझाव दिए थे. शुक्रवार की सुनवाई में अदालत ने पूछा कि जब सिफारिशें लागू कर दी गई थीं, तब फिर पेपर लीक जैसी घटना कैसे हुई.

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- निगरानी में कहां हुई चूक?
अदालत ने समिति के अध्यक्ष से पूछा कि कार्यान्वयन की निगरानी कितनी प्रभावी रही और आखिर व्यवस्था में विफलता कैसे सामने आई. इस दौरान अदालत ने संकेत दिए कि केवल सुझाव देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सही निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी है.

राधाकृष्णन कमेटी ने क्या कहा?
डॉ. राधाकृष्णन ने अदालत को बताया कि समिति ने कुल 60 सुझाव दिए थे, जिनमें से अधिकतर लागू किए जा चुके हैं. कुछ सुझाव अभी प्रक्रिया में हैं. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2025 की नीट यूजी परीक्षा संतोषजनक ढंग से आयोजित हुई थी और केवल कुछ परीक्षा केंद्रों पर बिजली बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आई थीं.

“राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को मजबूत करने की दी थी सलाह”
समिति अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की संरचना और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने की सिफारिश की थी. हालांकि अदालत ने इस पर जोर दिया कि सबसे बड़ी चिंता पेपर लीक और जिम्मेदारी तय करने की है.

सुप्रीम कोर्ट ने जवाबदेही पर दिया बड़ा संदेश
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि असली समस्या तब तक समाप्त नहीं होगी, जब तक जिम्मेदारी तय नहीं की जाती. अदालत ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि आखिर परीक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसके कंधों पर है और चूक के लिए कौन उत्तरदायी है.

विद्यार्थियों के भविष्य पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
अदालत ने कहा कि देश के लाखों विद्यार्थी वर्षों तक मेहनत करते हैं और ऐसी घटनाएं उनके भविष्य और भरोसे दोनों को प्रभावित करती हैं. इसलिए परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है.

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