By Malay Ojha | Published: 16 July 2026 at 09:42 PM
कटिहार जिले के मनिहारी निवासी 48 वर्षीय प्रेम कुमार राव (बदला हुआ नाम) को लंबे समय से एक ऐसी दुर्लभ बीमारी ने परेशान कर रखा था, जिसके कारण हर निवाला निगलना उनके लिए चुनौती बन गया था। खाना पेट तक पहुंचने के बजाय छाती में ही अटक जाता था और धीरे-धीरे सामान्य भोजन करना भी मुश्किल हो गया था। आखिरकार फोर्ड हॉस्पिटल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने करीब दो घंटे तक चली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए इस गंभीर समस्या का सफल इलाज किया। अब मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और बिना किसी परेशानी के सामान्य भोजन कर पा रहा है।
डॉक्टरों के मुताबिक मरीज अकैलेसिया कार्डिया नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित था। इस बीमारी में खाने की नली और पेट को जोड़ने वाला हिस्सा सामान्य तरीके से नहीं खुलता। नतीजा यह होता है कि भोजन पेट तक पहुंचने के बजाय बीच में ही रुक जाता है। शुरुआत में लोग इसे सामान्य गैस, एसिडिटी या पाचन की समस्या समझ लेते हैं, लेकिन समय रहते इलाज नहीं होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
दो घंटे चली लेप्रोस्कोपिक सर्जरी
फोर्ड हॉस्पिटल के निदेशक एवं जनरल सर्जन डॉ. संतोष कुमार के नेतृत्व में डॉ. आलोक कुमार और डॉ. प्रभात रंजन की टीम ने मरीज का ऑपरेशन किया। आधुनिक लेप्रोस्कोपिक तकनीक से करीब दो घंटे तक चली सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने खाने की नली और पेट के बीच बने अवरोध को सावधानीपूर्वक दूर किया। ऑपरेशन सफल रहा और मरीज को जल्द ही राहत मिलने लगी।
हेलर्स मियोटॉमी तकनीक से हटाया गया अवरोध
डॉक्टरों ने बताया कि इस सर्जरी में हेलर्स मियोटॉमी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके तहत खाने की नली और पेट के जोड़ पर मौजूद सख्त हो चुकी मांसपेशियों को नियंत्रित तरीके से काटा जाता है, ताकि भोजन का रास्ता दोबारा सामान्य हो सके। इस प्रक्रिया में ऊपर की ओर लगभग दो सेंटीमीटर और नीचे की ओर करीब चार सेंटीमीटर तक मांसपेशियों को काटकर अवरोध हटाया गया।
अब सामान्य तरीके से खा रहा है मरीज
सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई। डॉक्टरों की निगरानी में इलाज पूरा होने के बाद अब वह बिना किसी तकलीफ के सामान्य भोजन कर रहा है। अस्पताल के अनुसार मरीज की रिकवरी संतोषजनक रही और उसे निगलने में होने वाली परेशानी पूरी तरह खत्म हो गई है।
क्यों होती है यह बीमारी?
डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि अकैलेसिया कार्डिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में लंबे समय तक रहने वाली एसिडिटी, कुछ में आनुवंशिक कारण और कुछ मरीजों में वायरल संक्रमण इसकी वजह बन सकता है। हालांकि हर मरीज में बीमारी का कारण एक जैसा नहीं होता, इसलिए सही जांच के बाद ही इलाज तय किया जाता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार भोजन या पानी निगलने में दिक्कत हो, खाना बार-बार छाती में अटकने का एहसास हो, खाने के बाद उल्टी जैसी स्थिति बने या तेजी से वजन कम होने लगे तो इसे सामान्य समस्या मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
देर से इलाज कराने पर बढ़ सकता है खतरा
डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो इलाज अपेक्षाकृत आसान होता है और मरीज जल्दी स्वस्थ हो सकता है। लेकिन लंबे समय तक इलाज टालने पर खाने की नली में गंभीर बदलाव आ सकते हैं। कुछ मामलों में भविष्य में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए समय पर जांच और उपचार सबसे जरूरी है।
आधुनिक तकनीक से बढ़ी सफलता की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की वजह से मरीज को कम दर्द होता है, शरीर पर छोटा चीरा लगता है और रिकवरी भी तेजी से होती है। यही कारण है कि इस तरह की जटिल बीमारी के इलाज में अब आधुनिक सर्जरी तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
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