By Malay Ojha | Published: 24 October 2026 at 12:10 PM
दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब विवादित नारों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच उलझ गया है। परिसर की दीवारों पर कथित आपत्तिजनक नारे लिखे जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। इसी बीच प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने पहुंचे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
इमरान मसूद ने आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि कश्मीर को भारत से अलग करने वाले किसी भी नारे का वह समर्थन नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि छात्रों के आंदोलन को कमजोर करने के लिए कुछ लोगों ने विवादित पोस्टर लगाए थे। इस पूरे मामले में भाजपा, एबीवीपी, कांग्रेस और विश्व हिंदू परिषद के नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।
इमरान मसूद ने क्या कहा?
कांग्रेस सांसद ने कहा कि जामिया में ‘आजाद कश्मीर’ के समर्थन में कोई नारा नहीं लगाया गया। उन्होंने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए ऐसे नारों की निंदा करने की बात कही। मसूद ने पुलिस से विवादित पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। हालांकि, दीवारों पर नारे किसने लिखे थे, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
छात्रों ने बताया आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि विवादित नारों का मामला उठाकर छात्र संघ चुनाव की मूल मांग से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। छात्रों के मुताबिक, उनका आंदोलन विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व बहाल कराने के लिए है। उनका आरोप है कि इस तरह के विवाद से आंदोलन को नुकसान पहुंच सकता है।
छात्र संघ चुनाव के लिए तीन प्रमुख मांगें
यूनाइटेड स्टूडेंट्स ऑफ जामिया के बैनर तले प्रदर्शन कर रहे छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं। पहली, छात्र संघ चुनाव की तारीख घोषित की जाए। दूसरी, प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस ली जाए। तीसरी, सिक्योरिटी एडवाइजर और चीफ प्रॉक्टर को उनके पदों से हटाया जाए।
प्रशासन ने दो महीने में संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने की बात कही
विश्वविद्यालय की हाईलेवल कमेटी के मुताबिक, छात्र संघ का संविधान तैयार करने के लिए ड्राफ्ट कमेटी बनाई गई है। प्रशासन का कहना है कि संविधान और जरूरी नियम तय किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं है। कमेटी ने 12 अक्टूबर के बाद की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों की समीक्षा करने की बात भी कही है।
चुनाव की तारीख नहीं मिलने से नाराज छात्र
छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए करीब दो महीने का समय बताया है, लेकिन चुनाव कब होंगे, यह स्पष्ट नहीं किया। प्रदर्शनकारियों का सवाल है कि जब छात्र संघ चुनाव की मांग लंबे समय से उठ रही है, तो केवल संविधान तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करना पर्याप्त कैसे हो सकता है।
13 दिनों से भूख हड़ताल पर छात्र
आंदोलन के तहत कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी जासिम अली खान के मुताबिक, वह 13 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि प्रशासन ने दो महीने बाद तक संविधान का ड्राफ्ट तैयार करने की बात कही है, लेकिन चुनाव की कोई निश्चित तारीख नहीं दी है। छात्रों ने जरूरत पड़ने पर संविधान तैयार करने में सहयोग देने की पेशकश भी की है।
एबीवीपी और वीएचपी ने की कार्रवाई की मांग
दीवारों पर कथित विवादित नारे लिखे जाने के मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि छात्र संघ की बहाली की मांग लोकतांत्रिक तरीके से उठाई जानी चाहिए और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों को सही नहीं ठहराया जा सकता।
विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय की छवि खराब करने की कोशिश हो रही है। वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए शाहीन बाग आंदोलन का जिक्र किया। हालांकि, विवादित नारे लिखने वालों की पहचान को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
शोएब जमई ने भी उठाए सवाल
एआईएमआईएम की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष डॉ. शोएब जमई ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि छात्र संघ चुनाव को लेकर चल रहे प्रदर्शन को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने मीडिया से भी छात्र आंदोलन के मूल मुद्दे से ध्यान नहीं भटकाने की अपील की। जमई ने कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताया।
2005 में हुए थे जामिया में आखिरी चुनाव
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आखिरी बार वर्ष 2005 में छात्र संघ चुनाव हुए थे। इसके बाद 31 मार्च 2006 को विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में हिंसा, गड़बड़ी और पढ़ाई प्रभावित होने का हवाला देते हुए निर्वाचित छात्र संघ को भंग कर दिया था। वर्ष 2012 में छात्र संघ चुनाव कराने की मांग को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी, लेकिन चुनाव बहाल नहीं हो सके।
छात्र संघ की बहाली पर टिकी निगाहें
करीब दो दशक से छात्र संघ चुनाव नहीं होने के कारण इसकी बहाली की मांग समय-समय पर उठती रही है। मौजूदा आंदोलन में छात्र जल्द चुनाव कराने और स्पष्ट समयसीमा घोषित करने पर जोर दे रहे हैं। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन संविधान तैयार करने की प्रक्रिया को कितनी जल्दी पूरा करता है और चुनाव को लेकर अगला कदम कब उठाता है।
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