By Malay Ojha | Published: 24 October 2026 at 11:19 AM
बिहार में ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी कंपनियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। परिवहन विभाग ने नियमों के पालन में कमी को लेकर ओला और उबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कंपनियों को 30 अक्टूबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। तय नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
परिवहन विभाग ने रैपिडो और सवारी मिथिला जैसी कंपनियों को भी यात्रियों की सुविधा, ड्राइवरों की शिकायतों और व्यावसायिक वाहनों के इस्तेमाल से जुड़े निर्देशों का पालन करने को कहा है। विभाग की समीक्षा बैठक में आठ प्रमुख बिंदुओं पर सुधार करने की जरूरत बताई गई।
निजी गाड़ियों से टैक्सी चलाने पर सख्ती
परिवहन विभाग की प्रमुख आपत्तियों में निजी वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल भी शामिल है। नियमों के मुताबिक, एग्रीगेटर कंपनियों के ऐप पर निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले व्यावसायिक रूप से पंजीकृत वाहन ही जोड़े जा सकेंगे। निजी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
हिंदी और अंग्रेजी में मिलेगी चैटबॉट सुविधा
कंपनियों को अपने मोबाइल ऐप पर हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में चैटबॉट की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। इससे यात्रियों और ड्राइवरों को अपनी भाषा में जानकारी हासिल करने और समस्याओं का समाधान पाने में मदद मिलेगी। ड्राइवरों की शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए कॉल सपोर्ट की व्यवस्था भी करनी होगी।
कैंसिलेशन और नाइट चार्ज की जानकारी पहले देनी होगी
कैब बुक करने के बाद यात्रा रद्द करने पर लगने वाले शुल्क और रात में वसूले जाने वाले अतिरिक्त चार्ज को लेकर भी विभाग ने पारदर्शिता बरतने को कहा है। कंपनियों को यात्रियों को इन शुल्कों और संबंधित शर्तों की स्पष्ट जानकारी देनी होगी, ताकि बुकिंग के समय या यात्रा के दौरान किसी तरह का भ्रम न रहे।
ड्राइवर की आईडी ब्लॉक करने के लिए बनानी होगी SOP
किसी ड्राइवर की आईडी ब्लॉक या सस्पेंड करने की प्रक्रिया भी विभाग की निगरानी में है। कंपनियों को इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करनी होगी। इसमें प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना जरूरी होगा। यानी ड्राइवर के खिलाफ कार्रवाई से जुड़े मामले में उसका पक्ष सुनने और उचित प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान रखना होगा।
बिहार में स्थानीय कार्यालय और एयरपोर्ट पर पार्किंग की व्यवस्था
विभाग ने कंपनियों को बिहार में स्थानीय कार्यालय स्थापित करने और अपनी सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के समाधान की व्यवस्था मजबूत करने को कहा है। इसके अलावा, एयरपोर्ट पर कैब और एग्रीगेटर वाहनों के लिए उपयुक्त पार्किंग स्थल चिह्नित करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ समन्वय करने का निर्देश दिया गया है।
कंपनियों को अपने ऐप के ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम पर दिखने वाले संदेशों की अवधि दो सेकंड से बढ़ाकर 10 सेकंड करने को भी कहा गया है, ताकि यात्री और ड्राइवर सूचनाओं को आसानी से पढ़ सकें।
ऐप के जरिए एंबुलेंस बुकिंग बढ़ाने की तैयारी
बिहार परिवहन विभाग ऐप आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए एंबुलेंस सेवाओं का विस्तार करने की संभावना पर भी काम कर रहा है। इसके लिए संबंधित कंपनियों से एक सप्ताह के भीतर प्रस्ताव मांगा गया है। योजना के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से जरूरतमंद लोगों तक एंबुलेंस सेवा पहुंचाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
30 अक्टूबर को रिपोर्ट की होगी जांच
परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षा बैठक में पहले जारी निर्देशों के पालन की स्थिति देखी। राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने भी अनुपालन की निगरानी और जरूरत पड़ने पर जांच करने की बात कही है।
अब कंपनियों को तय समय-सीमा में रिपोर्ट सौंपनी होगी। विभाग रिपोर्ट की जांच कर यह देखेगा कि निर्देशों पर कितना अमल हुआ है। नियमों का पालन नहीं करने पर लाइसेंस रद्द करने समेत अन्य कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरी कवायद का उद्देश्य ऐप आधारित कैब और बाइक-टैक्सी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और ड्राइवरों की समस्याओं का समाधान करना है। अब निगाहें 30 अक्टूबर की समय-सीमा पर हैं, जब कंपनियों को अपने अनुपालन का ब्योरा विभाग के सामने रखना होगा।
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