By Malay Ojha | Published: 23 October 2026 at 12:38 PM
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई जिलों में 24 से 28 घंटे तक बिजली नहीं आने की शिकायतें सामने आई हैं। घरों में पानी की किल्लत है, जबकि औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, करनाल, अंबाला और सोनीपत समेत करीब 15 जिलों में बिजली संकट गहराने की खबरें हैं।
निजी कंपनी को 25 साल का लाइसेंस देने के विरोध में हड़ताल
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 22 से 24 अक्टूबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। कर्मचारी गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल का समानांतर लाइसेंस दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि इस फैसले से सरकारी बिजली वितरण निगम की कमाई पर असर पड़ेगा और करीब 40 हजार कर्मचारियों के रोजगार पर संकट आ सकता है।
बिजली गुल होने से पानी की सप्लाई भी प्रभावित
बिजली संकट का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। कई रिहायशी इलाकों और सोसायटियों में पानी की मोटरें बंद होने से लोगों को पीने के पानी के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, बिजली संबंधी फॉल्ट ठीक होने में देरी की शिकायतें भी सामने आई हैं। हड़ताल के शुरुआती 24 घंटों में गुरुग्राम में 5,000 से अधिक बिजली संबंधी शिकायतें दर्ज होने का दावा किया गया है।
उद्योगों में उत्पादन ठप होने का खतरा
बिजली सप्लाई बाधित होने से औद्योगिक क्षेत्रों में भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। गुरुग्राम के दौलताबाद और कादीपुर के अलावा करनाल और पानीपत के औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियों के कामकाज पर असर पड़ने की खबरें हैं। बिजली नहीं मिलने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है और कारोबार को नुकसान पहुंचने की आशंका है। एनसीआर के कुछ इलाकों में प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंधों के कारण जनरेटर के इस्तेमाल पर भी सीमाएं हैं। ऐसे में उद्योगों के सामने वैकल्पिक व्यवस्था करना आसान नहीं है।
क्या है 25 साल के लाइसेंस का पूरा विवाद?
इस पूरे विवाद की जड़ हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) का फैसला है। आयोग ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल का समानांतर लाइसेंस दिया है। इसके तहत निजी कंपनी को सरकारी बिजली वितरण निगम के साथ समानांतर रूप से बिजली वितरण करने का अधिकार मिल सकता है।
बिजली कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि गुरुग्राम जैसे औद्योगिक और कारोबारी क्षेत्रों से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को अच्छी आमदनी होती है। अगर बड़े उपभोक्ता निजी कंपनी के पास चले जाते हैं, तो सरकारी निगम की कमाई प्रभावित हो सकती है। कर्मचारियों को आशंका है कि इसका असर ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था तथा सब्सिडी पर भी पड़ सकता है।
सरकार बोली- कर्मचारियों की नौकरी पर नहीं आएगा संकट
बिजली संकट के बीच राज्य सरकार ने कर्मचारियों से हड़ताल खत्म कर बातचीत करने की अपील की है। बिजली मंत्री अनिल विज का कहना है कि सरकार कर्मचारियों के साथ खड़ी है और किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निजी कंपनी को लाइसेंस देने का फैसला सरकार ने नहीं, बल्कि स्वतंत्र नियामक संस्था HERC ने लिया है।
अनिल विज के मुताबिक, सरकार इस फैसले को अपीलीय प्राधिकरण APTEL में चुनौती देगी। जरूरत पड़ने पर अदालत से स्थगन आदेश लेने के लिए कर्मचारियों की पसंद के वकीलों की मदद भी ली जा सकती है। बिजली सप्लाई बहाल रखने के लिए अधिकारियों की छुट्टियां रद्द करने की बात भी सामने आई है।
कर्मचारियों की मांग- निजी लाइसेंस रद्द हो
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि केवल नौकरी सुरक्षित रखने का आश्वासन देने से विवाद खत्म नहीं होगा। उनकी मुख्य मांग गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को दिया गया समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस रद्द करने की है। संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन को अनिश्चितकालीन हड़ताल में बदला जा सकता है। इससे बिजली संकट और गहराने की आशंका है।
हुड्डा ने बीजेपी सरकार को घेरा
बिजली वितरण के निजी लाइसेंस को लेकर हरियाणा की राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष इस फैसले को बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है।
विपक्ष का आरोप है कि सरकार नियामक आयोग के फैसले का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। वहीं, सरकार का कहना है कि लाइसेंस देने का निर्णय HERC ने लिया है और इसे कानूनी प्रक्रिया के जरिए चुनौती दी जाएगी।
किसान और कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन
हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा और सीटू समेत कई संगठनों का समर्थन मिला है। ये संगठन निजी लाइसेंस वापस लेने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि सरकारी बिजली वितरण व्यवस्था को कमजोर करने वाले फैसले का विरोध जारी रहेगा।
इंडियन नेशनल लोकदल के नेता और पूर्व मंत्री प्रोफेसर संपत सिंह ने भी सरकार के रुख पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि सरकार चाहे तो निजी कंपनी को दिया गया लाइसेंस रद्द करने की पहल कर सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के इशारे पर यह लाइसेंस दिया गया। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है।
अब सबसे बड़ा सवाल: जनता को राहत कब मिलेगी?
हरियाणा में बिजली संकट ने सरकार, कर्मचारी संगठनों और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ा दिया है। एक तरफ कर्मचारी निजी लाइसेंस रद्द करने की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी तरफ सरकार कानूनी रास्ता अपनाने की बात कह रही है। इस विवाद के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम लोगों, किसानों और उद्योगों को उठानी पड़ रही है। अब देखना होगा कि बातचीत और कानूनी कार्रवाई के बीच बिजली सप्लाई कब तक सामान्य हो पाती है।
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