By Malay Ojha | Published: 21 October 2026 at 08:47 PM
ओलंपियन लक्ष्मीकांत पांडेय उर्फ चिक्कन पहलवान की पत्नी मिथिला पांडेय का बुधवार को 96 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कोइरीपुर खुर्द स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सामाजिक संगठनों, भाजपा नेताओं, खेल जगत और विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
मणिकर्णिका घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
मिथिला पांडेय की अंतिम यात्रा में सैकड़ों लोग शामिल हुए। रास्ते में कई जगह शव यात्रा रोककर लोगों ने उनके अंतिम दर्शन किए और पुष्प वर्षा कर श्रद्धांजलि दी। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। छोटे पुत्र कपिल नारायण पांडेय ने मुखाग्नि दी।
महिलाओं और जरूरतमंदों के लिए किया काम
मिथिला पांडेय सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही थीं। उन्होंने महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने, स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा पौधरोपण के जरिए पर्यावरण संरक्षण के लिए काम किया। गरीबों, असहायों और दिव्यांगों की मदद के लिए भी उन्होंने सराहनीय प्रयास किए। कुश्ती और खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के जरिए खेलों को बढ़ावा देने के लिए वह आजीवन प्रयासरत रहीं।
मेलबर्न ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं चिक्कन पहलवान
मिथिला पांडेय के पति लक्ष्मीकांत पांडेय उर्फ चिक्कन पहलवान ने महज 19 वर्ष की उम्र में वर्ष 1956 में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। वह 1956 से 1961 तक राष्ट्रीय चैंपियन रहे। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में राजपत्रित अधिकारी के रूप में सेवाएं दीं और वर्ष 1990 में सेवानिवृत्त हुए।
परिवार पर भी टूटा दुखों का पहाड़
मिथिला पांडेय के परिवार में तीन पुत्र और दो पुत्रियां थीं। उनके ज्येष्ठ पुत्र प्रभुनाथ पांडेय पुलिस इंस्पेक्टर थे। बांदा में तैनाती के दौरान ददुआ गैंग के साथ आमने-सामने की मुठभेड़ में वह शहीद हो गए थे। दूसरे पुत्र श्रीनारायण पांडेय का भी असामयिक निधन हो गया था। तीसरे पुत्र कपिल नारायण पांडेय कारमाइकल लाइब्रेरी के महामंत्री होने के साथ भाजपा के प्रबुद्ध वर्ग से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करते हैं और सक्रिय राजनीति में हैं। उनकी दोनों पुत्रियां विवाहित हैं।
अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग
मिथिला पांडेय के निधन की सूचना पर सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता, भाजपा नेता, कारमाइकल लाइब्रेरी से जुड़े वरिष्ठ सदस्य, ग्राम प्रधान, जिला पंचायत सदस्य, पहलवान, शिक्षक, अधिवक्ता और महिला संगठनों से जुड़ी महिलाएं पहुंचीं। सभी ने उनके सामाजिक योगदान को याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए। वह अपने पीछे नाती-पोतों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं।
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