By Malay Ojha | Published: 17 May 2026 at 05:35 PM
पटना स्थित जगजीवन राम संसदीय अध्ययन एवं राजनीतिक शोध संस्थान में रविवार को सोशलिस्ट पार्टी का 92वाँ स्थापना समारोह उत्साहपूर्ण माहौल में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के तहत दो अलग-अलग सत्रों में “समाजवादी संवाद” का आयोजन हुआ, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए समाजवादी चिंतकों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में अरुण श्रीवास्तव, वसी अहमद, प्रो विजय कुमार, सैयद तहसीन अहमद और संदीप पांडेय समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने समाजवादी विचारधारा की वर्तमान प्रासंगिकता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।
लोकतंत्र और चुनाव सुधार पर जोर
अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि राजनीतिक दलों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र मजबूत किए बिना देश में लोकतंत्र को मजबूत नहीं किया जा सकता। उन्होंने चुनावों में बढ़ते धनबल पर चिंता जताते हुए चुनाव सुधार को समय की सबसे बड़ी जरूरत बताया।
संविधान और समाजवादी सोच की जरूरत
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के केंद्रीय संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष सैयद तहसीन अहमद ने कहा कि मौजूदा दौर में संवैधानिक मूल्यों और समाजवादी सोच को बचाए रखने की चुनौती पहले से ज्यादा गंभीर हो गई है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर बल दिया।
संप्रदायवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील
गांधीवादी नेता वसी अहमद ने देश में बढ़ती सांप्रदायिकता पर चिंता जताई। उन्होंने लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द में विश्वास रखने वाले लोगों से एकजुट होकर समाज में भाईचारा कायम रखने की अपील की।
काव्य संग्रह का हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम के दौरान गांधी विचारक प्रो विजय कुमार के काव्य संग्रह “नये युग का आरोहण” का लोकार्पण भी किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को लेकर कई तरह की गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं, जबकि देश विभाजन का उन्होंने हमेशा विरोध किया था।
समाजवाद को बताया समय की मांग
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव संदीप पांडेय ने कहा कि मौजूदा सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में समाजवाद एक बार फिर प्रासंगिक होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आम लोगों के अधिकारों और बराबरी की लड़ाई को मजबूत करने के लिए समाजवादी सोच जरूरी है।
सवाल-जवाब के साथ कार्यक्रम का समापन
समारोह के अंत में उपस्थित लोगों और वक्ताओं के बीच सवाल-जवाब का दौर भी चला, जिसमें समकालीन राजनीति, लोकतंत्र और सामाजिक बदलाव से जुड़े मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गई।
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