By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 29 May 2026 at 07:29 PM
सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। हर महीने आने वाली पूर्णिमा का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन अधिकमास में पड़ने वाली पूर्णिमा विशेष फलदायी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दुर्लभ संयोग करीब तीन साल में एक बार आता है। ऐसे में इस दिन किए गए स्नान, दान, जप और पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता है।
अधिकमास पूर्णिमा का महत्व
अधिकमास पूर्णिमा के दिन गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किए गए धार्मिक कार्य व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता लाते हैं। कई लोग इस दिन व्रत रखकर भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा का पाठ भी करते हैं।
कब से लगेगी पूर्णिमा तिथि
पंचांग के अनुसार 30 मई की सुबह 11 बजकर 57 मिनट से पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। इसी रात चंद्रमा का उदय पूर्णिमा तिथि में होगा, इसलिए अधिकमास पूर्णिमा का व्रत 30 मई को रखा जाएगा। वहीं 31 मई को सूर्योदय के समय भी पूर्णिमा तिथि रहने के कारण इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा।
बन रहे हैं दो शुभ योग
इस बार अधिकमास पूर्णिमा पर रवि योग और शिव योग का खास संयोग बन रहा है। रवि योग सुबह 05 बजकर 24 मिनट से दोपहर 01 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि रवि योग में किए गए शुभ कार्यों से बाधाएं दूर होती हैं और सफलता मिलती है।
वहीं शिव योग पूरे दिन और पूरी रात रहने वाला है। यह योग जप, तप, ध्यान और भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
चंद्र देव को अर्घ्य देने का सही समय
अधिकमास पूर्णिमा व्रत के दिन चंद्रमा का उदय शाम 06 बजकर 40 मिनट पर होगा। हालांकि चंद्र देव को अर्घ्य देने का सबसे उत्तम समय वह माना जाता है, जब चंद्रमा पूरी तरह से आसमान में दिखाई देने लगे। इस दौरान दूध मिले जल से चंद्रमा को अर्घ्य देने और मंत्र जाप करने से चंद्र दोष शांत होने की मान्यता है।
सत्यनारायण पूजा का विशेष महत्व
पूर्णिमा के दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा सुनना बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और चंद्र देव दोनों की पूजा करते हैं।

