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JPSC भर्ती रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

By Malay Ojha | Published: 20 August 2026 at 04:33 PM

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच गुरुवार को अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी, जिसके तहत झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया था। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश दिया।

सरकार के फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई थी, जो चयन प्रक्रिया पूरी कर सरकारी नौकरी हासिल कर चुके थे। नियुक्तियां रद्द होने की स्थिति में उन्हें दोबारा प्रतियोगी परीक्षा और चयन प्रक्रिया से गुजरने का खतरा पैदा हो गया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के अंतरिम आदेश से फिलहाल प्रभावित कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को राहत मिली है।

किन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
गुरुवार को न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके कारण पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी पर सीधा असर पड़ रहा था।

सरकार ने क्यों रद्द कीं भर्तियां?
दरअसल, झारखंड में पिछले कई सप्ताह से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन चल रहा था। अभ्यर्थी लगातार परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता, परीक्षा एजेंसियों की भूमिका और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दबाव के बीच राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कुछ अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला लिया।

22 परीक्षाएं रद्द, कई की जांच
राज्य सरकार की ओर से जारी फैसले के अनुसार 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया है, जबकि छह परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित किया गया है। इसके अलावा कुछ पुरानी भर्ती परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाया गया है। सरकार की कार्रवाई में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा समेत कई भर्तियां शामिल हैं।

44 भर्तियों को लेकर क्यों उठा विवाद?
भर्ती विवाद की जड़ में परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल हैं। सरकार ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए कराई गई कई पुरानी परीक्षाओं की भी जांच का फैसला लिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2014 के बाद से एजेंसी के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं और सरकार ने इन मामलों की जांच कराने की बात कही है। इसी वजह से अलग-अलग विभागों में हुई भर्तियों का मामला भी विवाद में आ गया है।

2000 से ज्यादा नियुक्तियों पर असर
सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति हासिल कर ली थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रद्द की गई परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों के कारण दो हजार से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हुआ। इन अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, लेकिन बिना दोष साबित हुए चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है।

26 दिन तक चला छात्र आंदोलन
भर्ती परीक्षाओं को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन करीब 26 दिन तक चला। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। सरकार की ओर से परीक्षाओं को रद्द करने, कई मामलों की जांच कराने और परीक्षा सुधार समिति बनाने का भरोसा दिए जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया।

सरकार ने परीक्षा सुधार समिति भी बनाई
राज्य सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति बनाने का आश्वासन दिया है। इसका मकसद भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करना और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए जरूरी बदलाव सुझाना है। सरकार की कार्रवाई के पीछे यही तर्क दिया गया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बहाल किया जा सके।

अब हाईकोर्ट के आदेश से क्या बदलेगा?
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से फिलहाल उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां सरकार के रद्दीकरण आदेश की चपेट में आ रही थीं। खास तौर पर 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को लेकर सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लग गई है। इसका मतलब यह है कि इस स्तर पर नियुक्तियां रद्द करने की सरकारी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकेगी। हालांकि अंतिम फैसला अभी बाकी है और मामले में आगे की सुनवाई के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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JPSC भर्ती रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

By Malay Ojha | Published: 20 August 2026 at 04:33 PM

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच गुरुवार को अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी, जिसके तहत झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया था। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह अंतरिम आदेश दिया।

सरकार के फैसले के बाद उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई थी, जो चयन प्रक्रिया पूरी कर सरकारी नौकरी हासिल कर चुके थे। नियुक्तियां रद्द होने की स्थिति में उन्हें दोबारा प्रतियोगी परीक्षा और चयन प्रक्रिया से गुजरने का खतरा पैदा हो गया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए कई अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत के अंतरिम आदेश से फिलहाल प्रभावित कर्मचारियों और अभ्यर्थियों को राहत मिली है।

किन याचिकाओं पर हुई सुनवाई
गुरुवार को न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत में सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं से जुड़े मामलों पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। याचिकाकर्ताओं ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके कारण पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी पर सीधा असर पड़ रहा था।

सरकार ने क्यों रद्द कीं भर्तियां?
दरअसल, झारखंड में पिछले कई सप्ताह से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन चल रहा था। अभ्यर्थी लगातार परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता, परीक्षा एजेंसियों की भूमिका और कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे थे। आंदोलन के दबाव के बीच राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और कुछ अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला लिया।

22 परीक्षाएं रद्द, कई की जांच
राज्य सरकार की ओर से जारी फैसले के अनुसार 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया गया है, जबकि छह परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित किया गया है। इसके अलावा कुछ पुरानी भर्ती परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाया गया है। सरकार की कार्रवाई में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा समेत कई भर्तियां शामिल हैं।

44 भर्तियों को लेकर क्यों उठा विवाद?
भर्ती विवाद की जड़ में परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवाल हैं। सरकार ने आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए कराई गई कई पुरानी परीक्षाओं की भी जांच का फैसला लिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2014 के बाद से एजेंसी के माध्यम से कराई गई परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठे हैं और सरकार ने इन मामलों की जांच कराने की बात कही है। इसी वजह से अलग-अलग विभागों में हुई भर्तियों का मामला भी विवाद में आ गया है।

2000 से ज्यादा नियुक्तियों पर असर
सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा, जिन्होंने परीक्षा पास करने के बाद नियुक्ति हासिल कर ली थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रद्द की गई परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों के कारण दो हजार से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों के भविष्य पर संकट खड़ा हुआ। इन अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, लेकिन बिना दोष साबित हुए चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी से हटाना उचित नहीं है।

26 दिन तक चला छात्र आंदोलन
भर्ती परीक्षाओं को लेकर रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन करीब 26 दिन तक चला। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे। सरकार की ओर से परीक्षाओं को रद्द करने, कई मामलों की जांच कराने और परीक्षा सुधार समिति बनाने का भरोसा दिए जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित किया गया।

सरकार ने परीक्षा सुधार समिति भी बनाई
राज्य सरकार ने भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति बनाने का आश्वासन दिया है। इसका मकसद भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करना और भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए जरूरी बदलाव सुझाना है। सरकार की कार्रवाई के पीछे यही तर्क दिया गया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बहाल किया जा सके।

अब हाईकोर्ट के आदेश से क्या बदलेगा?
हाईकोर्ट की अंतरिम रोक से फिलहाल उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां सरकार के रद्दीकरण आदेश की चपेट में आ रही थीं। खास तौर पर 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को लेकर सरकार के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लग गई है। इसका मतलब यह है कि इस स्तर पर नियुक्तियां रद्द करने की सरकारी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकेगी। हालांकि अंतिम फैसला अभी बाकी है और मामले में आगे की सुनवाई के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

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