By लाइव आर्यावर्त टीम | Published: 29 May 2026 at 12:20 AM
भारत की सबसे प्राचीन और रहस्यमयी नगरी मानी जाने वाली काशी को भगवान शिव का धाम कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह नगरी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी हुई है और प्रलय के समय भी इसका अस्तित्व समाप्त नहीं होता. यही वजह है कि हर दिन यहां लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं.
धार्मिक ग्रंथों में काशी को मोक्ष देने वाली नगरी बताया गया है. मान्यता है कि यहां मृत्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है. कहा जाता है कि अंतिम समय में स्वयं भगवान शिव भक्त के कानों में तारक मंत्र का उच्चारण करते हैं, जिससे आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है.
पुराणों में छिपा है बड़ा रहस्य
गरुड़ पुराण और स्कंद पुराण में उल्लेख मिलता है कि काशी में मृत्यु के बाद आत्मा पर यमराज का अधिकार नहीं रहता. ऐसी मान्यता है कि जब स्वयं महादेव किसी आत्मा को मुक्ति प्रदान करते हैं, तब मृत्यु के देवता भी उस आत्मा को अपने अधीन नहीं कर सकते. यही कारण है कि काशी को सामान्य शहर नहीं बल्कि दिव्य नगरी माना जाता है.
आखिर क्यों नहीं करते भगवान शिव विश्राम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी में हर पल किसी न किसी जीव की अंतिम यात्रा चलती रहती है. कहा जाता है कि भगवान शिव यहां सदैव जागृत अवस्था में रहते हैं ताकि किसी भी आत्मा को मोक्ष के लिए प्रतीक्षा न करनी पड़े. यही वजह है कि काशी में शिव जी को कभी पूर्ण विश्राम की मुद्रा में नहीं दर्शाया जाता.
काशी को सबसे रहस्यमयी स्थान क्यों माना जाता है
मान्यता है कि अगर भगवान शिव काशी में विश्राम करने लगें तो मोक्ष का प्रवाह रुक जाएगा. इसलिए शिव जी इस नगरी में सदैव सक्रिय रहते हैं और कभी काशी का त्याग नहीं करते. यही कारण है कि काशी को एक साथ सबसे पवित्र और सबसे रहस्यमयी स्थान माना जाता है. यहां आने वाला हर व्यक्ति आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत शांति का अनुभव करता है.

